“जब नारी बनती है आत्मनिर्भर, तब परिवार सशक्त होता है और समाज प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी दूरगामी सोच के साथ सुशासन के मूल मंत्र को महिला उत्थान से जोड़ा है।”
विशेष रिपोर्ट | रायपुर
किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक तस्वीर वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी मजबूत सहभागिता से तय होती है। इसी परिकल्पना को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में घोषित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज राज्य की लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।
1. आर्थिक स्वतंत्रता का आधार: महतारी वंदन योजना
राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मार्च 2024 में शुरू की गई इस योजना के तहत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।
- अब तक 30 किस्तों के माध्यम से 19,444 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए महिलाओं को मिल चुकी है।
- वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है।
2. बेटियों के सुरक्षित भविष्य और स्वास्थ्य के लिए ऐतिहासिक कदम
सरकार ने बालिकाओं के भविष्य को संवारने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की हैं:
- रानी दुर्गावती योजना: बालिकाओं के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान (बजट में 15 करोड़ रुपये स्वीकृत)।
- पोषण और आंगनबाड़ी: वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ और कुपोषण मुक्ति योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही 750 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है।
- महतारी सदन: महिलाओं को प्रशिक्षण और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रदेशभर में महतारी सदन बनाए जा रहे हैं, जिनके तहत अब तक 368 सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है।
3. महिला सुरक्षा और डिजिटल नवाचार में देश में अग्रणी छत्तीसगढ़
महिला सुरक्षा और उत्पीड़न से निपटने के लिए सरकार ने चाक-चौबंद व्यवस्था की है:
- प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जहां कानूनी, चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता एक ही छत के नीचे मिलती है।
- महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 का प्रभावी समन्वय किया गया है।
- डिजिटल एसओपी (SOP) लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।
4. ‘लखपति दीदी’ और स्वरोजगार से बढ़ती आय
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूहों (SHG) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है:
- बिहान मिशन के तहत 2.92 लाख से अधिक समूहों से 31.65 लाख महिलाएं जुड़ी हैं।
- प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ विजन को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की जा चुकी हैं।
- महिला समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार देने के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है।
- आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ (Jashpure) ब्रांड आज “वोकल फॉर लोकल” का एक सफल प्रतीक बनकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।
विश्लेषण -सुशासन से समृद्धि की ओर
आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का अभियान बन चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मजबूत नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की नारी शक्ति आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ “विकसित छत्तीसगढ़” के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रही है।



