रायपुर, ( मनोज वर्मा ) : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ‘अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा’ के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। इसी क्रम में राज्य के दूरस्थ एवं दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी), विकासखंड गौरेला में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को सिद्ध किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है कि प्रदेश के सुदूर वनांचलों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए भटकना न पड़े। इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दुर्गम रास्तों को तय कर सीधे गांव पहुंचकर ग्रामीणों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
शिविर की प्रमुख झलकियाँ:
- विशेषज्ञों की टीम का गांव आगमन: शिविर में हड्डी रोग, महिला रोग, नेत्र रोग और मेडिसिन विशेषज्ञों की टीम ने उपस्थित होकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
- 164 ग्रामीणों को मिला लाभ: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में कुल 164 ग्रामीणों को मौके पर ही उपचार और परामर्श प्रदान किया गया।
- निःशुल्क दवाइयां और तत्काल राहत: जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं, जिससे ग्रामीणों को तत्काल राहत मिली।
- जागरूकता पर जोर: उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को पोषण, स्वच्छता और मौसमी बीमारियों से बचाव के प्रति भी जागरूक किया।
सुशासन की पहचान: सरकार खुद पहुंच रही जन-जन तक
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार का मानना है कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है। यह पहल न केवल बीमारियों की समय पर पहचान और त्वरित उपचार सुनिश्चित कर रही है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रही है।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी में संपन्न हुए इस शिविर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है।


