दिल्ली

भारत में बाघ संरक्षण: एक वैश्विक सफलता की कहानी

दिल्ली | भारत विज्ञान आधारित नीतियों, मजबूत संस्थागत सहयोग और तकनीकी नवाचारों के दम पर आज वैश्विक बाघ संरक्षण में अग्रणी बन चुका है। वर्तमान में दुनिया के लगभग 70% जंगली बाघ भारत में निवास करते हैं। यह उपलब्धि देश की समृद्ध जैव-विविधता और प्रकृति के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 विशेषताएँ और उपलब्धियाँ

  • ​विश्व की सबसे बड़ी आबादी: अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2022) के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3,682 हो गई है, जो 2006 के बाद से दोगुनी से भी अधिक है।
  • ​विशाल सर्वेक्षण: 2022 का बाघ अनुमान 20 राज्यों में 6.41 लाख किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पैदल चलकर किया गया दुनिया का सबसे बड़ा जैव विविधता सर्वेक्षण था।
  • ​प्रोजेक्ट टाइगर और एनटीसीए: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत संचालित ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के माध्यम से देश के 18 राज्यों में 58 बाघ अभ्यारण्य (लगभग 84,500 वर्ग किमी क्षेत्र) स्थापित किए गए हैं।
  • ​प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी: बाघों की सटीक निगरानी के लिए एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) ऐप, कैमरा ट्रैप डेटा विश्लेषण के लिए ‘कैट्रैट’ (CaTRAM) और धारीदार पैटर्न पहचानने के लिए ‘एक्सट्रैक्टकम्पेयर’ जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

​सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व

  • ​राष्ट्रीय पशु: बाघ भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और इसे 1972 में राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया था।
  • ​अंब्रेला प्रजाति: एक शीर्ष शिकारी और ‘संरक्षण छत्र’ (अंब्रेला प्रजाति) के रूप में बाघ वनों, नदियों और अनगिनत अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करता है, जिससे जल नियंत्रण और जलवायु संतुलन में मदद मिलती है।

​वैश्विक नेतृत्व और सहयोग

​भारत केवल अपने देश तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बाघ संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है:

    • ​इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA): सात प्रमुख व्याघ्र प्रजातियों (बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा) के संरक्षण के लिए इस वैश्विक गठबंधन का सचिवालय भारत में स्थित है।
    • ​ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF): नई दिल्ली में मुख्यालय वाला यह संगठन बाघ-रेंज वाले 13 देशों को एक मंच पर लाकर संयुक्त संरक्षण रणनीतियों को बढ़ावा देता है।
    • ​CA/TS मान्यता: भारत के 23 टाइगर रिजर्वों को ‘कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स’ (CA/TS) की मान्यता प्राप्त है, जो वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रबंधन को दर्शाता है।

हर साल 29 जुलाई को मनाया जाने वाला ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ हमें बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूक करता है। भारत अपनी मजबूत नीतियों, डेटा-संचालित निगरानी और सामुदायिक भागीदारी के जरिए बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों के एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है।

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