Tuesday, August 4, 2026

बिलासपुर में जलप्रलय: 18 घंटे की बारिश से थमी शहर की रफ्तार, सीपत मार्ग पर कटा संपर्क

बिलासपुर ( मनोज वर्मा ) पिछले 18 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर शहर को जलमग्न कर दिया है। शहर के निचले इलाकों से लेकर पॉश वीआईपी कॉलोनियों तक पानी घुसने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस आपदा ने नगर निगम के ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों की पोल खोल दी है, वहीं आम जनता भारी-भरकम टैक्स चुकाने के बाद भी ‘नरकीय जीवन’ जीने को मजबूर है।

​सीपत रोड बनी ‘नदी’, औद्योगिक संपर्क टूटा

​बिलासपुर की लाइफलाइन कही जाने वाली सीपत रोड पर स्थिति सबसे भयावह है। मार्ग पर 2 से 3 फीट पानी बहने के कारण आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। यह मार्ग बिलासपुर को एन.टी.पी.सी. (NTPC) और कोरबा जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ता है, जिसके चलते भारी वाहनों और यात्रियों का संपर्क शहर से कट गया है। मोपका के पास गुड़ाखू फैक्ट्री के समीप स्थित नाला खतरे के निशान से 4 फीट ऊपर बह रहा है, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

​50 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा, वीआईपी इलाके भी जलमग्न

​बारिश की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगरा पुल के बनने के बाद पिछले 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार आवागमन इतना बुरी तरह बाधित हुआ है। वहीं, शहर के वीआईपी एरिया कहे जाने वाले कमिश्नर बंगला, अज्ञेय नगर और ग्रीन पार्क जबडा पारा जैसी पॉश कॉलोनियों में पानी भर जाने से प्रशासनिक तंत्र भी अछूता नहीं रहा। ग्राम पंथी में दीवान पेट्रोल पंप के पास नाले के ऊपर 3 फीट पानी और पैठू तालाब का पार टूटना प्रशासन की जल निकासी व्यवस्था की नाकामी को दर्शा रहा है।

​जनप्रतिनिधियों और पुलिस की सक्रियता

​संकट की इस घड़ी में राहत कार्य के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास जारी हैं। मोपका क्षेत्र के पार्षद तिलक राम साहू और मोहन श्रीवास  , मनोज यादव , राजू साहू , प्रदीप गुप्ता सुबह से ही जलभराव वाले इलाकों में डटे हुए हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, पुलिस विभाग से आरक्षक संतोष राठौर भी सुबह से ही सक्रिय नजर आए, जो यातायात को सुचारू करने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए मुस्तैदी से काम कर रहे हैं।

​भारी टैक्स, सुविधा शून्य: जनता का आक्रोश

​एक ओर जहाँ शहर आपदा से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम द्वारा वसूले जा रहे भारी-भरकम टैक्स को लेकर जनता में जबरदस्त उबाल है। मोपका के रहवासियों का कहना है कि उन्हें 50 हजार से लेकर 1 लाख 10 हजार रुपये तक के टैक्स बिल थमाए गए हैं।

​एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम सुविधाओं के नाम पर भारी टैक्स भर रहे हैं, लेकिन बदले में हमें मिल रहा है सिर्फ जलभराव और असुरक्षा। सीवर और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह विफल है।”

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Bilaspur Bulletin

Editor in chief
Kamal kumar gupta
BJMC ,MJMC, ph,D (per)

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