रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जल संरक्षण की दिशा में उठाए जा रहे कदम ग्रामीण अंचल में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत राजपुर में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के तहत निर्मित सामुदायिक चेक डेम ने क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी है। यह चेक डेम आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जल संवर्धन और कृषि समृद्धि का एक उत्कृष्ट व प्रेरणादायी मॉडल बन गया है।
16 लाख की लागत से साकार हुई महत्वाकांक्षी परियोजना
ग्राम पंचायत राजपुर में भागवत के खेत के पास बने इस सामुदायिक चेक डेम के लिए 16.02 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी, जिसके तहत 15.69 लाख रुपए (मजदूरी पर 2.79 लाख और सामग्री पर 12.55 लाख रुपए) व्यय किए गए। इस निर्माण कार्य से स्थानीय स्तर पर 1671 मानवदिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे ग्रामीणों को गांव में ही काम मिला, जिससे पलायन रुका और गरीब परिवारों की आजीविका मजबूत हुई।
चेक डेम की मुख्य विशेषताएं और लाभ:
- जल संरक्षण क्षमता: 12 मीटर स्पैन वाले इस चेक डेम की जल संरक्षण क्षमता 10,080 घनमीटर है, जिससे वर्षा का व्यर्थ बह जाने वाला पानी अब संचित हो रहा है।
- भू-जल स्तर में सुधार: भू-जल भंडार समृद्ध होने से आसपास के कुओं, हैंडपंपों और बोरवेल्स का जलस्तर बढ़ा है, जिससे गर्मियों के दिनों में भी जल संकट से राहत मिली है।
- सिंचाई का दायरा बढ़ा: इस परियोजना से लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधे तौर पर सिंचाई सुविधा मिल रही है।
- फसलों का विविधीकरण: कभी पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहने वाली खेती अब आत्मनिर्भर हो गई है। किसान भगवाता सुखराम, बुसाहु राम सिंह, चितरेखा पुनित, ईष्वरी मधुर सिंह और केवल पचरू जैसे कई किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी और सब्जी फसलों की भी बंपर पैदावार ले रहे हैं।
टिकाऊ कृषि और पलायन पर लगाम
तकनीकी सहायक सुश्री पूजा पटेल ने बताया कि चेक डेम का निर्माण पूरी तरह से उच्च तकनीकी मानकों के तहत किया गया है। यह संरचना न केवल किसानों को सूखे के संकट से उबारती है, बल्कि टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी बढ़ावा देती है।
ग्रामीणों और पंचायत के रोजगार सहायकों का कहना है कि खेतों में नमी लंबे समय तक टिकने के कारण अब फसल खराब होने की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। राजपुर का यह सामुदायिक चेक डेम इस बात का सशक्त प्रमाण है कि वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का वैज्ञानिक प्रबंधन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है।


