राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ में नशे की बढ़ती समस्या पर लगाम कसने के लिए कड़े प्रशासनिक कदमों के साथ-साथ व्यापक जनजागरूकता बेहद जरूरी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधीक्षक श्री अनिल कुमार ने यह बात राजनांदगांव में आयोजित “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत—संकल्प अभियान” के तहत पत्र सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
- आपूर्ति और मांग पर एक साथ नियंत्रण: एनसीबी अधीक्षक श्री अनिल कुमार ने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के साथ-साथ इनकी मांग को कम करना भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
- मीडिया की निर्णायक भूमिका: युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने में मीडिया की पहुंच और उसके प्रभाव को सबसे बड़ा हथियार बताया गया। डिजिटल माध्यमों, टेलीविजन और समाचार पत्रों से अपील की गई कि वे तथ्यपरक और सरल भाषा में युवाओं को जागरूक करें।
- पत्रकारिता और सामाजिक सरोकार: वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती प्रियंका कौशल ने कहा कि पत्रकारिता को केवल सूचना तक सीमित न रखकर इसे सामाजिक सरोकार और जनआंदोलन से जोड़ना होगा। फिल्मों और गानों में नशे के महिमामंडन को चुनौती देने की आवश्यकता है।
- सामूहिक भागीदारी: कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर दिया कि युवाओं को सुरक्षित रखने के लिए केवल सरकार या परिवार नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया को मिलकर एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना होगा।
इस अवसर पर ‘सबेरा संकेत’ के संपादक श्री सुशील कोठारी, ‘दैनिक दावा’ के संपादक श्री दीपक बुद्धदेव, दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शंकर मुनि राय और एनसीबी के जोनल निदेशक श्री रवि जोशी सहित कई गणमान्य पत्रकार व शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में छत्तीसगढ़ को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।



