नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ‘कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन’ (SMAM) योजना देश के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्रों की पहुंच सुनिश्चित करना और खेती की उत्पादकता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
योजना के प्रमुख बिंदु:
- आर्थिक सहायता: वर्ष 2014-15 से अब तक 9,404.47 करोड़ रुपये की सहायता से देशभर के किसानों को 21.61 लाख से अधिक कृषि मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।
- समावेशी विकास: योजना के तहत कुल बजट का 30 प्रतिशत हिस्सा महिला किसानों के लिए आरक्षित है, ताकि कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।
- कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC): जो किसान महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते, उनके लिए 27,554 कस्टम हायरिंग सेंटर और 25,608 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जहाँ से किसान सस्ती दरों पर उपकरण किराए पर ले सकते हैं।
- ड्रोन तकनीक का दबदबा: कृषि में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से 40,918 हेक्टेयर क्षेत्र में 40,000 से अधिक ड्रोन प्रदर्शन किए गए हैं। ड्रोन खरीदने के लिए एफपीओ को 75% तक का अनुदान दिया जा रहा है।
- पूर्वोत्तर पर विशेष ध्यान: पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि मशीनीकरण को गति देने के लिए लघु मशीनों पर 100% और फार्म मशीनरी बैंक के लिए 95% तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
खेती में क्रांतिकारी बदलाव:
SMAM के माध्यम से बुआई से लेकर फसल कटाई और कटाई के बाद के प्रबंधन तक, हर स्तर पर मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल मानव और पशु श्रम पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि कृषि कार्यों में सटीकता और दक्षता भी आई है। लागत में कमी और समय की बचत के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
समीक्षा :
SMAM योजना न केवल कृषि उपकरणों के वितरण तक सीमित है, बल्कि यह प्रशिक्षण, प्रदर्शन और आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से एक “स्मार्ट खेती” का इकोसिस्टम तैयार कर रही है। यह पहल भारत को एक कुशल और आत्मनिर्भर कृषि शक्ति बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।


