नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को सुचिता और सुरक्षा के नए पैमाने देने के लिए केंद्र सरकार ने बेहद कड़े और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की साख को पुनर्जीवित करने और छात्रों का भरोसा फिर से कायम करने के लिए गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स को अब तक की सबसे मजबूत और हाई-प्रोफाइल समिति माना जा रहा है।
🛡️ क्या होगा इस ‘सुपर टास्क फोर्स’ का मुख्य कार्य?
- जीरो-एरर (शून्य-त्रुटि) परीक्षा प्रणाली: परीक्षा की पूरी प्रक्रिया—प्रश्न पत्र सेट करने से लेकर, छपाई, कूरियर के जरिए वितरण और कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) केंद्रों के संचालन—को पूरी तरह छेड़छाड़-मुक्त बनाना।
- साइबर सुरक्षा कवच: आधुनिक एआई टूल्स, डेटा एनालिटिक्स और मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन का उपयोग कर डिजिटल सेंधमारी और हैकिंग के हर रास्ते को बंद करना।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: परीक्षा केंद्रों के चयन में पारदर्शिता लाना और लापरवाही बरतने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना व कानूनी कार्रवाई के कड़े प्रावधान तय करना।
🔬 दिग्गजों की यह टीम क्यों है खास?
इस टास्क फोर्स में शामिल प्रत्येक विशेषज्ञ अपने क्षेत्र का बेताज बादशाह है:
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- तकनीक और डेटा की ताकत (नंदन नीलेकणि): ‘आधार’ जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली के वास्तुकार नंदन नीलेकणि परीक्षा डेटा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अभेद्य बनाएंगे।
- अंतरिक्ष जैसी सटीकता (डॉ. एस. सोमनाथ): चंद्रयान और गगनयान जैसी सफल मिशनों का नेतृत्व करने वाले इसरो के पूर्व प्रमुख एस. सोमनाथ पूरी प्रणाली में ‘जीरो-डिफेक्ट’ (दोषरहित) कार्य संस्कृति लागू करेंगे।
- खुफिया सुरक्षा (तपन डेका): इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व प्रमुख तपन डेका यह सुनिश्चित करेंगे कि संगठित गिरोहों, सॉल्वर गैंग्स और पेपर लीक सिंडिकेट्स की जड़ों तक पहुंचकर उनका सफाया किया जाए।
- तकनीकी शिक्षा का अनुभव (प्रो. वी. कामकोटि): आईआईटी मद्रास के निदेशक तकनीकी मूल्यांकन और ऑनलाइन परीक्षाओं की सुरक्षा में आने वाली तकनीकी अड़चनों को दूर करेंगे।
- प्रशासनिक और नीतिगत अनुभव (अनिता करवाल): पूर्व शिक्षा सचिव स्कूली और उच्च शिक्षा के प्रशासनिक ढांचे की कमियों को दूर कर ठोस नीतियां तैयार करेंगी।
- परिवहन और सुरक्षा (अमृत लाल मीणा): लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रश्न पत्र देश के कोने-कोने तक बिना किसी लीक के सुरक्षित पहुंचें।
छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत: जानकारों का मानना है कि इस समिति के सुझावों के लागू होने के बाद NTA परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी हो जाएंगी, जिससे देश के लाखों मेधावी छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा और उन्हें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा।


