बिलासपुर (मनोज वर्मा ) : छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अब अपने विशिष्ट सुगंधित कृषि उत्पाद ‘विष्णुभोग चावल’ के कारण पूरे देश में एक नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत इस चावल को जिले का प्रमुख उत्पाद चुना गया है, जिसकी महक अब खेतों से निकलकर देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है।
विष्णुभोग चावल की मुख्य विशेषताएँ और आंकड़े
- उत्पादन क्षेत्र: पेंड्रा क्षेत्र के लगभग 1,500 किसान करीब 600 एकड़ भूमि में इसकी पारंपरिक खेती कर रहे हैं।
- महिला सशक्तिकरण: मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के जरिए 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है।
- व्यापारिक सफलता: महिलाओं के समूह द्वारा अब तक 2 टन विष्णुभोग चावल की बिक्री की जा चुकी है, जिससे करीब 1 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है।
- आर्थिक लाभ: यह पहल महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
महिला स्व-सहायता समूहों की सराहनीय पहल
विष्णुभोग चावल की खेती से लेकर उसकी ब्रांडिंग और विपणन (मार्केटिंग) तक में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। स्थानीय महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी किसानों से सीधे धान खरीदती है, जिसके बाद मिनी राइस मिल में इसका प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजारों में उतारा जा रहा है।
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की नई पहचान
किसानों की कड़ी मेहनत, प्राकृतिक खेती के तौर-तरीके और महिला उद्यमिता के इस अनूठे संगम ने जीपीएम जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। आने वाले समय में इस सुगंधित चावल की ब्रांडिंग और विपणन को मिलने वाला प्रोत्साहन छत्तीसगढ़ की कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग मुकाम दिलाएगा।



