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चाय से शक्कर गायब, भाषणों में विकास का पहिया: शैलेश पाण्डेय 

बिलासपुर

  • रसोई पर महंगाई का ग्रहण: छत्तीसगढ़ और देश भर में आम आदमी की थाली से अब शक्कर (चीनी) की मिठास भी गायब होने लगी है।
  • पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय का कटाक्ष: बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय ने मौजूदा हालात पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार के नुमाइंदे जनता की परेशानी पर आँखें मूंदकर सिर्फ वादों के महल बना रहे हैं।
  • जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री का आक्रामक प्रहार: जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने तीखे अंदाज में कहा कि डबल इंजन सरकारें आसमान छूती कीमतों के बीच केवल कागजी विकास की फिल्म दिखा रही हैं।

​देश और छत्तीसगढ़ में बढ़ती महंगाई अब उस मुकाम पर पहुँच चुकी है, जहाँ आम आदमी केवल यह सोचकर हैरान है कि वह अपनी जेब संभाले या रसोई का बजट। दाल, तेल और सब्जियों के बाद अब चीनी (शक्कर) के दाम इस रफ्तार से भाग रहे हैं, मानो उन्हें किसी मैराथन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना हो। एक तरफ आम जनता बिना चीनी की फीकी चाय पीने को मजबूर है, तो दूसरी तरफ हुक्मरानों के बयानों में मीठी-मीठी बातें अब भी जारी हैं।

​इस व्यथा पर बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पाण्डेय ने बेहद मजाकिया और करारा तंज कसते हुए कहा —   वाह रे डबल इंजन की सरकार! दावों में तो जनता के लिए खुशियों के फव्वारे छोड़े जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि रसोई की हर एक चीज पर महंगाई का ऐसा ग्रहण लगा है कि आम आदमी की थाली से शक्कर और मिठास दोनों गायब हो चुकी हैं। लगता है सरकार चाहती है कि जनता बिना चीनी की फीकी चाय पीकर ही ‘अच्छे दिन’ के सपने देखती रहे। कम से कम कागजों पर तो चीनी के दाम इतने सस्ते हैं कि लगता है अधिकारी उसी हवा-हवाई चाय की चुस्की ले रहे हैं!”

 

​महंगाई पर महेंद्र गंगोत्री के तीखे बोल

​दूसरी ओर, जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने इस मुद्दे पर सरकार के दावों की हवा निकालते हुए आक्रामक शैली में कहा – केंद्र और राज्य की सरकारें आम जनता को राहत देने के बजाय मुनाफाखोरों और जमाखोरों को बकायदा ‘सुरक्षा कवच’ मुहैया करा रही हैं। शक्कर जैसी बुनियादी खाद्य वस्तु के दाम जिस तेजी से ऊपर चढ़ रहे हैं, उसे देखकर तो यही लगता है कि सरकार ने महंगाई को रॉकेट पर सवार कर दिया है। बस फर्क इतना है कि रॉकेट आसमान में जाकर गायब हो जाता है, और महंगाई सीधे आम आदमी की जेब खाली करके यहीं बैठी रहती है। डबल इंजन की सरकार का यह इंजन सिर्फ जुमलों की पटरी पर दौड़ रहा है, जनता की थाली से तो अब मिठास हमेशा के लिए गायब हो चुकी है।”

 

 फीकी चाय और भारी जेब

​बढ़ते दामों पर नेताओं के इस व्यंग्यात्मक और तीखे अंदाज ने राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर दिया है। अब देखना यह है कि जनता की इस ‘फीकी चाय’ में सरकार कब तक राहत की चाशनी घोल पाती है, या फिर आम आदमी यूं ही महंगाई के इस कड़वे घूंट को पीने के लिए विवश रहता है।

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Bilaspur Bulletin

Editor in chief
Kamal kumar gupta
BJMC ,MJMC, ph,D (per)

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