राजनीति

छत्तीसगढ़ में महंगाई का हाहाकार: शक्कर के बढ़े दामों को लेकर कांग्रेस नेता राजेंद्र धीवर ने दोनों सरकारों को घेरा

  1. ​चीनी की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि: छत्तीसगढ़ और देश भर में आम आदमी की थाली और रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है। विशेष रूप से शक्कर (चीनी) के दामों में आई भारी तेजी से उपभोक्ता परेशान हैं।
  2. ​कांग्रेस नेता का तीखा प्रहार: ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं बिलासपुर जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र धीवर ने बढ़ती महंगाई को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है।
  3. ​दोनों सरकारें विफल: राजेंद्र धीवर ने आरोप लगाया है कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने में पूरी तरह से असफल साबित हुई हैं।

​देशभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में इन दिनों महंगाई चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। आम जनता के जरूरी उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वर्तमान समय में बाजार में चीनी (शक्कर) के रेट में अचानक भारी उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। त्योहारी सीजन और रोजमर्रा की जरूरत के बीच शक्कर के बढ़े हुए दामों ने गृहिणियों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

​इस गंभीर मुद्दे पर बिलासपुर जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र धीवर ने मुखर होकर अपनी बात रखी है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज देश का गरीब और मध्यम वर्ग महंगाई की चक्की में पिस रहा है, लेकिन सरकारें मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों पर नकेल कसने में पूरी तरह नाकाम रही हैं।

  • ​रसोई पर सीधा प्रहार: क्षेत्र के जनपद सभापति मनोज खरे ने कहा कि शक्कर जैसी बुनियादी खाद्य वस्तु के दाम बढ़ने से आम जनता का जीना दूभर हो गया है।
  • ​सरकारी नीतियों की नाकामी: केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण आज महंगाई अनियंत्रित हो चुकी है। जनता ने जिन सरकारों को राहत देने के लिए चुना था, वे जनता की सुध लेने में विफल रही हैं।
  • ​चुप्पी साधने का आरोप: क्षेत्र क्रमांक 05 के जनपद सदस्य प्रतिनिधि , कांग्रेस नेता विजय गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि कागजी दावों और विज्ञापनों में विकास दिखाने वाली सरकारें जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और बढ़ती कीमतों पर पूरी तरह मौन बैठी हैं।

​जनता की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

​स्थानीय बाजारों में खरीदारों का कहना है कि दाल, तेल, सब्जियों के बाद अब शक्कर के दामों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। यदि समय रहते सरकार ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिल सकता है।

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