रायपुर:
राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान अमूल्य है और उनके समग्र विकास के बिना एक विकसित राज्य की परिकल्पना अधूरी है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। राज्य सरकार के इन ढाई वर्षों में श्रम विभाग ने श्रमिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने, उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।
प्रमुख उपलब्धियाँ एवं कल्याणकारी पहलें
- प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण: श्रमिकों तक त्वरित सेवाएँ पहुँचाने के लिए प्रदेश में अब कुल 33 श्रम कार्यालय (10 सहायक श्रमायुक्त और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय) संचालित किए जा रहे हैं।
- ब्यापार और उद्योग सुगमता (Ease of Doing Business): छत्तीसगढ़ कारखाना नियम और दुकान एवं स्थापना नियमों में संशोधन कर महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोले गए हैं तथा 24 घंटे के भीतर श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी करने का प्रावधान किया गया है।
- विशाल सामाजिक सुरक्षा दायरा: छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार मंडल के माध्यम से अब तक 56.83 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।
- आर्थिक सहायता एवं व्यय: वर्ष 2026 में 30 जून तक लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं का लाभ देने के लिए 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
- आवास और स्वरोजगार सहायता में वृद्धि:
- मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत मिलने वाली राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है।
- दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत महिला श्रमिकों के लिए सहायता राशि भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पौष्टिक आहार पर विशेष जोर
- अटल कैरियर निर्माण योजना: पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क और उच्च गुणवत्तापूर्ण कोचिंग दी जाएगी।
- अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना: श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। वर्ष 2026-27 से इस योजना के तहत लाभान्वित बच्चों का कोटा 100 से बढ़ाकर 200 कर दिया गया है।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
- शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना: प्रदेश के 18 जिलों में संचालित 39 भोजन केन्द्रों के माध्यम से श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गर्म एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
डिजिटल सशक्तिकरण और सुरक्षित कार्यस्थल
- ई-श्रम साथी मोबाइल ऐप: इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए श्रमिकों और नियोजकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है, जिससे घर बैठे पंजीयन और रोजगार की जानकारी मिल रही है।
- मॉडल लेबर चौक: श्रमिकों को असुविधा से बचाने और सम्मानजनक कार्य वातावरण देने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं।
- दुर्घटना एवं मृत्यु सहायता: कार्यस्थल पर दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तथा सामान्य मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में नियमानुसार बड़ी आर्थिक सहायता राशि आश्रितों को प्रदान की जा रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार की ये सभी योजनाएं यह साबित करती हैं कि राज्य में श्रमिकों को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि राज्य की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी माना जा रहा है।



