- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की लखपति दीदियों के उत्पादों को मिल रहा है एक नया बाजार
- सावन माह के पावन अवसर पर आयोजित मेले में मिलेट उत्पाद, वनोपज और हस्तशिल्प की हो रही है धूम
रायपुर/कबीरधाम
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर चौरा में पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का शुभारंभ हो गया है। इस भव्य मेले का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किया। इस दौरान उन्होंने स्व-सहायता समूहों की ‘लखपति दीदियों’ को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार को एक नई दिशा देने के साथ-साथ मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव रखते हैं।
ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण का अनूठा मंच
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने मेले में लगाए गए 50 से अधिक स्टालों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने महिला समूहों से उनके उत्पादों के बारे में विस्तार से चर्चा की, स्टॉल से खरीदारी कर उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने जानकारी दी कि यह मेला 06 अगस्त की शाम तक जारी रहेगा। यह आयोजन केवल खरीदारी का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। एक ही छत के नीचे आगंतुकों को ताजे और पौष्टिक मिलेट उत्पाद, स्थानीय वनोपज, बांस-बेंत से बने आकर्षक हस्तशिल्प, हथकरघा सामग्री, पारंपरिक परिधान और जैविक खाद्य वस्तुएं बेहद किफायती दरों पर मिल रही हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
उद्घाटन समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका श्रीमती तरुणा साहू ने ‘द्रौपदी चीरहरण’ और अन्य प्रसंगों की मार्मिक प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल, बोड़ला के स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए मनमोहक ‘शिव तांडव’ नृत्य ने उपस्थित सभी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
दुर्ग संभाग की कला और उत्पादों का विशाल प्रदर्शन
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि इस सरस मेले में दुर्ग संभाग के विभिन्न जिलों—जैसे कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई—की महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां हिस्सा ले रही हैं।
मेले में उपलब्ध प्रमुख सामग्रियां:
- जैविक खाद्य पदार्थ: हल्दी, मिर्ची, धनिया, कोदो-कुटकी, ब्लैक राइस और विभिन्न प्रकार के अचार (आम, कटहल, नींबू, महुआ)।
- घरेलू एवं सजावटी वस्तुएं: अगरबत्ती, दोना-पत्तल, फैशनेबल हैंडबैग, श्रृंगार का सामान और आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सभी जिलावासियों से अपील की है कि वे सावन के इस पवित्र महीने में बाबा भोरमदेव के दर्शन के साथ-साथ संभागीय सरस मेले में पहुंचें और स्वदेशी उत्पादों की खरीदी कर ग्रामीण महिलाओं का उत्साहवर्धन करें।


