नई दिल्ली:
देशभर के छात्र संगठनों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजने की खबर को CJP और आंदोलनकारी छात्र अपने संघर्ष की एक बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी इस घटनाक्रम को छात्रों के हक में एक बड़ी सफलता बताते हुए इस जीत में अपनी भी सक्रिय भागीदारी और समर्थन का दावा किया है।
मुख्य बिंदु:
- छात्रों और CJP का संघर्ष: NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी सबसे बड़ी और ‘नॉन-नेगोशिएबल’ (गैर-समझौता योग्य) मांग बनाया था। इसे अब युवा शक्ति की जीत माना जा रहा है।
- कांग्रेस का रुख: कांग्रेस पार्टी ने भी इस पूरी लड़ाई में छात्रों का पुरजोर समर्थन किया था और अब इस राजनीतिक घटनाक्रम को विपक्ष के दबाव तथा छात्र एकता की जीत के रूप में पेश कर रही है।
- राजनीतिक सरगर्मी तेज: विपक्ष और छात्र संगठनों के लगातार दबाव के बाद आए इस त्यागपत्र ने संसद के मानसून सत्र में भी हलचल बढ़ा दी है, जहां इसे लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


