नई दिल्ली
– भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की वास्तविक जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बताया है।
- एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने स्थिर दृष्टिकोण के साथ भारत की ‘बीबीबी/ए-2’ सॉवरेन रेटिंग की पुष्टि की है।
आर्थिक वृद्धि के आंकड़े:
- वास्तविक जीडीपी: पहली तिमाही में 81.36 लाख करोड़ रुपये (7.8% वृद्धि)।
- नॉमिनल जीडीपी: 88.27 लाख करोड़ रुपये (10.3% वृद्धि)।
- वास्तविक जीवीए (सकल मूल्य वृद्धि): 73.82 लाख करोड़ रुपये (8.2% वृद्धि)।
- निवेश और खपत: निवेश में 11.9 प्रतिशत, घरेलू खपत में 7.1 प्रतिशत और निर्यात में 12.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
क्षेत्रवार प्रदर्शन:
- तृतीयक (सेवा) क्षेत्र: वित्तीय, रियल एस्टेट और आईटी सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की जोरदार तेजी के साथ कुल वृद्धि 10.0 प्रतिशत दर्ज की गई।
- द्वितीयक (औद्योगिक) क्षेत्र: विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कुल विस्तार 8.6 प्रतिशत रहा। पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन भी 15.2 प्रतिशत बढ़ा।
- बैंक ऋण विस्तार: जुलाई 2026 में उद्योग क्षेत्र के लिए ऋण 20.0 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र के लिए 22.9 प्रतिशत बढ़ा।
प्रमुख नीतिगत उपाय:
- सेमीकॉन 2.0 योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत।
- मोबाइल फोन निर्माण योजना का परिव्यय 2030-31 तक 62,500 करोड़ रुपये तय।
- कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पीएम-किसान योजना को 3.15 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ आगे बढ़ाने की मंजूरी।
- भारत-यूके सीईटीए और भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) जुलाई 2026 से लागू।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, सरकार द्वारा शुरू किए गए नीतिगत उपायों और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक आधार वाली गति के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 में भी अपनी तेज विकास यात्रा को बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।



