रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सपत्नीक श्रीमती कौशल्या साय के साथ ऐतिहासिक एवं विश्वप्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर की परिक्रमा कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पंच दिवसीय ‘महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान’ में भी भाग लिया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की।
सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है भोरमदेव:
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भोरमदेव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। इस तरह के महाअनुष्ठान हमारी प्राचीन वैदिक परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव को सशक्त बनाते हैं।
श्रावण मास और कांवड़ यात्रा पर विशेष घोषणा:
मुख्यमंत्री ने आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाले पवित्र श्रावण मास का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों की तरह इस बार भी वे उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुँचकर कांवड़ यात्रियों पर पुष्पवर्षा करेंगे और उनका स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का अहम हिस्सा है।
महाअनुष्ठान के बारे में:
श्री महादिव्य देशम फाउंडेशन के तत्वावधान में 25 जुलाई से शुरू हुआ यह पंच दिवसीय महाअनुष्ठान कबीरधाम सहित पूरे छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक कल्याण के लिए आयोजित किया जा रहा है। फाउंडेशन के प्रमुख राजीव राकुल स्वामी (केरल) के अनुसार, यह अनुष्ठान प्राचीन वैदिक परंपरा, भगवान परशुराम स्तोत्रम और आगम शास्त्रों के विधि-विधान पर आधारित है।
इस कार्यक्रम के दौरान पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, वैदिक आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


