Tuesday, August 4, 2026

भारत ने वामपंथी उग्रवाद पर पाई निर्णायक विजय, देश नक्सल-मुक्त घोषित

नई दिल्ली:

भारत ने आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) पर निर्णायक विजय प्राप्त कर ली है। लगभग छह दशकों तक देश के विकास और सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहे ‘रेड कॉरिडोर’ का दायरा अब घटकर शून्य हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई बहुआयामी, समन्वित और एकीकृत रणनीति के परिणामस्वरूप देश का अब कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं है।

​📉 हिंसा के आंकड़ों में भारी गिरावट

  • घटनाओं में कमी: वर्ष 2010 को नक्सलवाद के इतिहास का सबसे हिंसक वर्ष माना जाता है, जब एक साल में 1,936 हिंसा की घटनाएं हुईं और 1,005 लोगों की जान गई थी। वहीं, 2014 में यह घटनाएं 870 थीं, जो घटकर 2026 (29 जुलाई तक) में मात्र 33 रह गई हैं।
  • मृतकों की संख्या: इसी अवधि में मृतकों का आंकड़ा 310 से गिरकर केवल 11 पर आ गया है।
  • प्रभावित जिले: वर्ष 2014 में देश के 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, जिनमें से 35 जिले अत्यधिक प्रभावित थे। मार्च-अप्रैल 2026 तक यह संख्या घटकर शून्य हो गई है।

​🛡️ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

​पिछले एक दशक में सरकार ने सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की नीति पर काम किया है:

  • पुलिस थाने और शिविर: 2014 से पहले जहां केवल 66 सुदृढ़ पुलिस थाने थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 663 हो गई है। इसके अलावा 408 नए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) शिविर और 68 रात्रि-अवतरण हेलीपैड बनाए गए हैं।
  • सड़क व डिजिटल कनेक्टिविटी: वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 15,189 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। साथ ही, 9,497 नए मोबाइल टावर लगाकर 96 प्रतिशत गांवों (44,728 गांवों) तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई गई है।
  • वित्तीय समावेशन: अप्रैल 2015 से मार्च 2026 के बीच इन क्षेत्रों में 1,804 नई बैंक शाखाएं, 1,321 एटीएम और 6,025 डाकघर खोले गए हैं।

​🤝 ऐतिहासिक आत्मसमर्पण और पुनर्वास

​कड़ी सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ सरकार की उदार आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ने उग्रवाद की कमर तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

  • ​अकेले वर्ष 2025 में 2,337 नक्सलियों ने हथियार डाले, जबकि 2024 से मार्च 2026 के बीच कुल 3,927 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया।
  • ​हाल ही में 28-29 जुलाई 2026 को कई बड़े इनामी कमांडरों और माओवादी नेताओं ने भारी मात्रा में हथियारों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया या उन्हें गिरफ्तार किया गया।

​📚 शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय कल्याण

  • एकलव्य विद्यालय: आदिवासी बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 259 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 179 संचालित हो रहे हैं।
  • कौशल विकास: 47 आईटीआई और 49 कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से 90,000 से अधिक युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है।
  • बस्तर कायापलट: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा के साथ-साथ ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक्स’ और शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा पहल जैसी योजनाओं के जरिए क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

​नक्सल-मुक्त भारत का यह लक्ष्य हासिल करना केवल एक उग्रवाद के अध्याय का अंत नहीं है, बल्कि देश के सबसे वंचित समुदायों के लिए शांति, समावेश, सम्मान और प्रगति के एक नए युग की शुरुआत है।

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Bilaspur Bulletin

Editor in chief
Kamal kumar gupta
BJMC ,MJMC, ph,D (per)

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