कोच्चि, 9 जुलाई 2026 ( मनोज वर्मा )
भारत की अध्यक्षता में केरल के कोच्चि में आयोजित ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक आज एक ऐतिहासिक मील के पत्थर के साथ संपन्न हुई। चार दिनों तक चले इस मंथन ने न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दी है, बल्कि ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में स्थापित कर दिया है।
पहली बार रचा गया इतिहास
इस सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव ब्रिक्स के इतिहास में पहली बार ‘संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य’ का अपनाया जाना रहा। यह महज एक कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि सदस्य देशों की उस साझा इच्छाशक्ति का प्रतिबिंब है, जो लैंगिक समानता और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भविष्य की सबसे बड़ी प्राथमिकता मानती है।
डिजिटल युग में महिला सशक्तिकरण: भारत का विजन
भारत ने ब्रिक्स के सदस्य देशों के सामने दो ऐसी डिजिटल पहलों का खाका रखा, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया:
- ब्रिक्स डिजिटल रिपॉजिटरी: अब सदस्य देश एक-दूसरे की सफल नीतियों और नवाचारों को एक क्लिक पर जान सकेंगे। यह ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का एक साझा ग्लोबल हब होगा।
- डिजिटल क्षमता निर्माण दिशानिर्देश: यह पहल संस्थागत सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को गति देगी, जिससे महिलाओं की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता को भविष्य के लिए तैयार किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने साझा की दूरदर्शिता
समापन समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा, “ब्रिक्स देश भले ही अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक परिवेश से आते हों, लेकिन हमारी चुनौतियां एक समान हैं। महिला सशक्तिकरण ही वह सूत्र है जो हमें एक साथ लाता है। यह मंच संवाद से परे ठोस कार्रवाई का आधार बनेगा।”
भारत के ‘सक्सेस मॉडल’ से प्रभावित हुए प्रतिनिधि
सम्मेलन के दौरान लगी प्रदर्शनी में भारत के ‘महिला-नेतृत्व विकास’ के सफल मॉडलों ने विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा:
- आर्थिक क्रांति: ‘लखपति दीदी’ और ‘सरस’ पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता।
- सशक्त भविष्य: खेल में ‘अस्मिता’ और STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) में बालिकाओं की बढ़ती भागीदारी के आंकड़े।
- सुरक्षा तंत्र: ‘वन स्टॉप सेंटर’ और ‘शी-बॉक्स’ जैसे डिजिटल सुरक्षा कवच ने महिला सशक्तीकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।


