बिलासपुर
जिला प्रशासन ने उपभोक्ता अधिकारों के हनन और गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को मगरपारा स्थित बालाजी गैस एजेंसी के कार्यालय और महाराणा चौक स्थित गैस गोदाम पर छापामार कार्रवाई की। कलेक्टर संजय अग्रवाल के स्पष्ट निर्देशों के बाद की गई इस कार्रवाई में स्टॉक में भारी हेरफेर का खुलासा हुआ है, जिसके बाद कुल 939 गैस सिलेंडर जब्त कर लिए गए हैं। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से शहर के गैस वितरकों में हड़कंप मच गया है।
स्टॉक के भौतिक सत्यापन में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर
जिला प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त जांच टीम ने जब ऑनलाइन रिकॉर्ड और धरातल पर मौजूद वास्तविक स्टॉक का मिलान किया, तो एक बड़ा वित्तीय और प्रशासनिक घालमेल सामने आया:
- ऑनलाइन बनाम वास्तविक स्टॉक: सॉफ्टवेयर और आधिकारिक ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार गोदाम में 864 भरे हुए सिलेंडर होने चाहिए थे। किंतु, भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर मात्र 452 भरे हुए सिलेंडर ही पाए गए।
- गायब सिलेंडरों की संख्या: रिकॉर्ड और मौके के मिलान में 412 भरे गैस सिलेंडर कम पाए गए, जो सीधे तौर पर कालाबाजारी या गंभीर स्टॉक विसंगति की ओर संकेत करता है।
- खाली सिलेंडरों का गणित: इसके विपरीत, रिकॉर्ड में 473 खाली सिलेंडर दर्ज थे, जबकि मौके पर 487 खाली सिलेंडर (रिकॉर्ड से 14 अधिक) बरामद किए गए।
- कुल जब्ती: अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद, टीम ने 452 भरे और 487 खाली सिलेंडरों सहित कुल 939 सिलेंडरों को अपनी अभिरक्षा में लेकर जब्त कर लिया।
उपभोक्ताओं के बयान और गंभीर प्रशासनिक शिकायतें
छापेमारी के दौरान जांच दल ने मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं के प्रत्यक्ष बयान दर्ज किए। प्रारंभिक पड़ताल में यह बात सामने आई कि एजेंसी उपभोक्ताओं के साथ गंभीर लापरवाही बरत रही थी:
- उपभोक्ताओं की ओर से मुख्य शिकायत थी कि बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें समय पर रसोई गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है।
- कई मामलों में यह भी पाया गया कि सिस्टम में सिलेंडर की ऑनलाइन डिलीवरी बाकायदा प्रदर्शित हो रही थी, जबकि वास्तविक रूप से उपभोक्ता को सिलेंडर की प्राप्ति नहीं हुई थी।
- नेशनल कॉल सेंटर के साथ-साथ सीएम हेल्पलाइन (1076) पर भी इस एजेंसी के विरुद्ध लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं, जिन्हें कलेक्टर ने संज्ञान में लिया था।
प्रशासनिक टीम और उच्च-स्तरीय जांच दल
कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर गठित इस बहु-विभागीय (Multi-departmental) संयुक्त जांच दल में राजस्व, खाद्य विभाग और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के जिम्मेदार अधिकारी शामिल रहे, जिन्होंने पूरी कार्रवाई को पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया:
- श्री प्रकाश साहू (तहसीलदार)
- श्री अजय मौर्य (सहायक खाद्य अधिकारी)
- श्रीमती विनीता दास (खाद्य निरीक्षक)
- श्रीमती वर्षा सिंह (खाद्य निरीक्षक)
- श्री मंगेश कांत (खाद्य निरीक्षक)
- श्रीमती ललिता शर्मा (खाद्य निरीक्षक)
- श्री आशीष दीवान (खाद्य निरीक्षक)
- श्रीमती वसुधा राजपूत (खाद्य निरीक्षक)
- श्री पंकज छेतिजा (सेल्स ऑफिसर, आईओसीएल)
अब आगे क्या? (प्रतिवेदन और आगामी कार्रवाई)
पत्रकारिता के दृष्टिकोण से इस मामले का अगला चरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। जांच दल द्वारा एजेंसी के तमाम व्यावसायिक दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टरों, डिजिटल लॉग और उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों का सूक्ष्म परीक्षण किया जा रहा है। टीम द्वारा सात दिवस के भीतर एक विस्तृत और तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन (Inquiry Report) कलेक्टर को सौंपा जाएगा। इस रिपोर्ट में मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) तथा अन्य कानूनी धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है।



