बिलासपुर— कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक में हर घर जल योजनाओं के सुदृढ़ीकरण और लंबित कार्यों को गति देने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए हैं। बैठक का मुख्य फोकस जल जीवन मिशन के लंबित भुगतानों के अनुमोदन के साथ-साथ जल स्रोतों की दीर्घकालीन स्थिरता, भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और ग्रामीण स्वच्छता पर रहा।
15 हर घर जल योजनाओं के अंतिम भुगतान का अनुमोदन
बैठक में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित जल जीवन मिशन के तहत लंबित कार्यों और अंतिम भुगतान के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई। जिन 15 योजनाओं के भुगतान का अनुमोदन हुआ है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- चकरभाठा, मटियारी, लोफंदी, फरहदा और लघरा
- मणिकपुर, बन्नाकडीह, घोघरा, कोरबी और बांका
- रामपुर, गोपालपुर, कुली, बरेली और बैमा
जल स्रोतों की स्थिरता और भूजल पुनर्भरण पर जोर
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत जल स्रोतों की दीर्घकालीन सुरक्षा के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है:
- सोखपिट निर्माण: जिले में स्थापित कुल 9,285 हैंडपंपों में से 7,428 स्थानों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध पाई गई है, जहां सोखपिट और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की जाएंगी।
- वाटर/इंजेक्शन वेल: जल जीवन मिशन के 1,494 जल स्रोतों के लिए भूजल पुनर्भरण व्यवस्था विकसित करने की योजना पर विचार किया गया है। इस प्रत्येक इकाई की अनुमानित लागत 4.45 लाख रुपये तय की गई है।
वित्तीय संसाधनों का अभिसरण और गुणवत्ता जांच
- गैप फंडिंग: सोलर आधारित जल योजनाओं के लिए आवश्यक गैप फंडिंग की व्यवस्था ग्राम पंचायतों के माध्यम से 16वें वित्त आयोग के जल एवं स्वच्छता संबंधी प्रावधानों से किए जाने पर चर्चा हुई।
- गुणवत्ता नियंत्रण: पाइप और संबंधित निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की पारदर्शी और मजबूत जांच के लिए 1.53 लाख रुपये की लागत से मफल फर्नेस (Muffle Furnace) की स्थापना या क्रय के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर निर्देश
कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं:
- ठस अपशिष्ट प्रबंधन: जिन गांवों में 100 किलोग्राम से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, वहां वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण को प्राथमिकता दी जाएगी।
- जल संरक्षण संरचनाएं: प्रत्येक ग्राम में स्थानीय भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप 2 से 3 जल पुनर्भरण संरचनाएं विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन का आगामी चरण केवल पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह जल स्रोतों की स्थिरता, नियमित जलापूर्ति, जल संरक्षण और ग्राम पंचायत आधारित सेवा प्रबंधन की दिशा में एक समग्र अभियान होगा।



