बिलासपुर (मनोज वर्मा )
बिलासपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर प्रस्तावित 4-लेन उत्तरी बाईपास के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए 8 गांवों के 644 खसरों की भूमि के क्रय-विक्रय, बटांकन और विभाजन पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा जारी इस आदेश के बाद से उन निवेशकों और आम नागरिकों में असमंजस की स्थिति बन गई है, जिन्होंने इन खसरों के प्लॉट या जमीन के लिए महीनों पहले अनुबंध (Agreement) करा रखा है और वे रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे थे।
- किसानों और विक्रेताओं की उलझन: जिन किसानों ने अपनी जरूरतों या पारिवारिक कारणों से महीनों पहले जमीनों के अनुबंध (एग्रीमेंट) कर रखे थे और टोकन या एडवांस राशि ले ली थी, वे अब कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। रोक लगने से रजिस्ट्री और नामांतरण का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे आपसी लेन-देन को लेकर विवाद और मानसिक तनाव की स्थिति बन रही है क्योंकि कई किसान ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी पुत्री की व्याह करनी है या किसी की विशेष मेडिकल परिस्थिति के कारण जमीन बेच रहे है ऐसे दर्जनों समस्या है ।
कलेक्टर संजय अग्रवाल का स्पष्ट बयान: 3D प्रक्रिया से मिलेगी राहत
हताश और चिंतित अनुबंध धारकों के लिए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए एक बड़ी राहत भरी बात कही है। कलेक्टर के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में बहुत अधिक समय नहीं खींचा जाएगा। जैसे ही प्रभावित जमीनों के लिए 3D (भूमि अर्जन की घोषणा) का गजट नोटिफिकेशन जारी होगा, वास्तविक और वैध मामलों में प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे राहत और समाधान का रास्ता मिल जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य भू-अर्जन को पारदर्शी बनाना है, न कि वैध पक्षों को अनावश्यक रूप से परेशान करना।
परियोजना और तकनीकी पहलू
- सड़क का दायरा: एनएच-130 पर कि.मी. 0.000 से कि.मी. 20.921 तक कुल 20.921 किलोमीटर लंबा 4-लेन बाईपास मार्ग।
- विभाग का फेरबदल: यह मार्ग वर्तमान में छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी (PWD) के पास है, जिसे एनएचएआई (NHAI) में स्थानांतरित किया जाना है।
- टेंडर प्रक्रिया: इस सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पहले से ही गतिशील है, जिसे ध्यान में रखते हुए भूमि अधिग्रहण की यह कार्रवाई तेज की गई है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 14 अक्टूबर 2024 के निर्देशों के तहत यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भू-अर्जन से पहले जमीनों के टुकड़े कर कृत्रिम रूप से मुआवजे की राशि न बढ़ाई जा सके। हालांकि, एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के अनुरोध पर लगाई गई यह रोक प्रशासनिक रूप से भले ही सही हो, लेकिन जिन लोगों ने महीनों पहले अनुबंध कर रखा है, उनकी निगाहें अब आगामी 3D नोटिफिकेशन पर टिकी हैं ताकि उनकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित हो सके।
संपादकीय
इस पूरी स्थिति का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि इसकी मार सीधे तौर पर उन किसानों और आम खरीदारों पर पड़ रही है जिनकी आजीविका और कमाई इन जमीनों से जुड़ी है। कई किसानों ने अपनी पारिवारिक जरूरतों या अन्य व्यवस्थाओं के चलते जमीनों के सौदे किए थे और टोकन या एडवांस राशि ले चुके हैं। अब अचानक लगे इस प्रतिबंध से न केवल रजिस्ट्री और नामांतरण का रास्ता बंद हुआ है, बल्कि आपसी लेन-देन को लेकर भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
दूसरी ओर, शासन और प्रशासन का अपना तर्क है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों के तहत यह कार्रवाई इसलिए जरूरी समझी गई ताकि बाईपास के दायरे में आने वाली जमीनों के छोटे-छोटे टुकड़े कर कृत्रिम तरीके से मुआवजे की राशि को न बढ़ाया जा सके। पूर्व में कई परियोजनाओं में यह देखने को मिला है कि अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले भू-माफिया या कुछ लोग मुआवजे की अधिक राशि हड़पने के लिए रातों-रात जमीनों के फर्जी बटांकन करा लेते हैं। इस लिहाज से प्रशासन का यह कदम सरकारी खजाने को सुरक्षित रखने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उचित प्रतीत होता है।
हालांकि, प्रशासनिक सख्ती का यह मतलब कतई नहीं होना चाहिए कि वैध और वास्तविक रूप से जमीन बेचने-खरीदने वाले किसान पिस जाएं। राहत की बात यह है कि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए भरोसा दिलाया है कि इस प्रक्रिया को ज्यादा लंबा नहीं खींचा जाएगा। जैसे ही प्रभावित जमीनों के लिए 3D (भूमि अर्जन की घोषणा) का गजट नोटिफिकेशन जारी होगा, वास्तविक और वैध मामलों में नियमानुसार राहत और समाधान का रास्ता मिल जाएगा।
अभी के इस दौर में यह आवश्यक है कि प्रशासन केवल पाबंदियां लगाने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन मालिकों और अनुबंध धारकों की शंकाओं का त्वरित समाधान भी करे। बाईपास जैसी विकास परियोजनाएं क्षेत्र की तकदीर बदलती हैं, लेकिन यह तभी सार्थक माना जाएगा जब इस विकास की कीमत आम किसानों और ईमानदार नागरिकों को अपनी पूंजी दांव पर लगाकर न चुकानी पड़े। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द 3D नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करे ताकि किसानों का अटका हुआ हक उन्हें सुरक्षित मिल सके।



