रायपुर (मनोज वर्मा ) — छत्तीसगढ़ में दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को महानदी भवन (मंत्रालय) में समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की एक संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय तथा अन्य अंतर्विभागों से जुड़े मुद्दों पर कई अहम फैसले लिए गए।
- फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की होगी त्वरित जांच: फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के आधार पर शासकीय सेवाओं में कार्यरत 186 व्यक्तियों के मामलों की जांच के लिए विशेष राज्य मेडिकल बोर्ड या संभागीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत इन मामलों की त्वरित जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
- सुगम होगी UDID कार्ड और प्रमाण-पत्र प्रक्रिया: भारत सरकार के मापदंडों के अनुसार अस्थायी एवं स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र तथा यूडीआईडी (UDID) कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी ली जाएंगी।
- उभयलिंगी समुदाय के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं: उभयलिंगी समुदाय के व्यक्तियों के लिए सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) संबंधी सहायता अनुदान और बाजार दरों के अनुरूप इसके संशोधन पर चर्चा हुई। साथ ही, शासकीय अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने हेतु पृथक ‘ट्रांसजेंडर क्लीनिक/वार्ड’ बनाने पर भी सहमति बनी।
- नशामुक्ति केंद्रों का सुदृढ़ीकरण: मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के तहत संचालित नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन और उनके बेहतर संचालन की समीक्षा की गई। इसके साथ ही, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित पुनर्वास संस्थाओं में रह रहे हितग्राहियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के निर्देश दिए गए।
इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, आयुक्त सह संचालक श्री संजीव झा और संचालक श्री रणवीर शर्मा सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



