बिलासपुर/सीपत (सागर यादव ) — छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड स्थित ठरकपुर गांव आज जल संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का एक बेहतरीन मॉडल बन चुका है। कभी पानी की कमी और मिट्टी के कटाव से जूझने वाला यह गांव, अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बने एक सामुदायिक सीसी चेक डैम की बदौलत आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है।
: कार्य योजना एक नजर
- योजना: मनरेगा (महात्मा गांधी नरेगा)
- परियोजना: सामुदायिक सीसी चेक डैम निर्माण
- लागत: 19.01 लाख रुपये (वर्ष 2025-26)
- मुख्य लाभ: भूजल स्तर में वृद्धि, बारहमासी सिंचाई सुविधा, और नकदी फसलों का उत्पादन।
जल संकट से मुक्ति और खुशहाली का सफर
कुछ समय पहले तक ठरकपुर गांव में बारिश का सारा पानी नालों से बहकर बेकार चला जाता था। इसके कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा था, कुएं और नलकूप सूख जाते थे और किसान साल में केवल एक ही फसल ले पाते थे।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर मनरेगा के अंतर्गत नाले पर सीसी चेक डैम बनाने का प्रस्ताव रखा। श्रमदान और सक्रिय भागीदारी से यह निर्माण कार्य पूरा हुआ, जिसने गांव की तस्वीर ही बदल दी।
खेती और अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार
- सिंचाई सुविधाओं का विस्तार: चेक डैम बनने से भूजल स्तर में भारी सुधार हुआ है। अब कुएं और नलकूप वर्षभर पानी से भरे रहते हैं।
- बहुफसलीय खेती: किसान अब पारंपरिक खेती के अलावा टमाटर और मिर्च जैसी लाभप्रद नकदी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग दोगुनी हो गई है।
- पशुपालन को बढ़ावा: क्षेत्र में बारहमासी पानी की उपलब्धता से पशुओं के लिए चारे और पेयजल की समस्या दूर हुई है, जिससे दुग्ध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- मिट्टी के कटाव पर रोक: चेक डैम के कारण भूमि का कटाव रुक गया है, जिससे खेतों की उपजाऊ शक्ति सुरक्षित है।
ठरकपुर गांव के किसानों का यह सफर साबित करता है कि सही समय पर किया गया जल संरक्षण और सामुदायिक प्रयास किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां दे सकता है।


