रायपुर | (मनोज वर्मा )
इस रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को प्रकृति की सोंधी खुशबू का अनूठा अहसास मिलने जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की अनूठी पहल के तहत इस बार बाजार में खस की जड़ों से बनी पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से बनी और बायोडिग्रेडेबल (पर्यावरण-अनुकूल) राखियां आ चुकी हैं। इन राखियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पानी की बूंद पड़ते ही ये अपनी प्राकृतिक और मनमोहक खुशबू बिखेरने लगती हैं।
- प्रकृति और परंपरा का संगम: वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा इन विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है।
- महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार: बोर्ड के मार्गदर्शन में धमतरी जिले की अन्नपूर्णा महिला स्व-सहायता समूह (नारी) की 10 महिलाओं ने मिलकर ऐसी 1000 से अधिक विशेष राखियां तैयार की हैं।
- पानी और नमी से महकती है राखी: बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की हल्की सी बूंद भी जब इस राखी पर पड़ती है, तो खस की प्राकृतिक खुशबू चारों तरफ फैल जाती है।
- त्वचा और पर्यावरण के लिए सुरक्षित: पूरी तरह वन संपदा पर आधारित होने के कारण ये राखियां त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनसे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
यह नवाचार न केवल पारंपरिक त्योहार को खास बना रहा है, बल्कि स्थानीय वन संपदा और पारंपरिक ज्ञान का उपयोग कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए द्वार भी खोल रहा है। इस रक्षाबंधन भाई की कलाई पर सिर्फ बहन का प्यार ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी और प्रकृति की सोंधी महक भी बंधेगी।



