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छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी में अब डिजिटल युग की शुरुआत: निर्माण कार्यों की मानिटरिंग और बिल भुगतान के लिए लागू होगा ‘वमिस’ (WAMIS

👉 कैबिनेट की मुहर: अब भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर लगेगी लगाम, एक ही क्लिक पर मिलेगी हर प्रोजेक्ट की जानकारी

👉 उप मुख्यमंत्री अरुण साव की पहल: कागजी औपचारिकताओं से मुक्ति, कार्यों में आएगी तेजी और पारदर्शिता

बिलासपुर / रायपुर:

छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) में अब निर्माण कार्यों की पूरी कार्यप्रणाली पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह होने जा रही है। राज्य शासन ने निर्माण कार्यों के सुचारू और आधुनिक प्रबंधन के लिए ‘वमिस’ (Work & Accounts Management Integration System – WAMIS) प्रणाली लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हाल ही में संपन्न कैबिनेट बैठक में इसे हरी झंडी दे दी गई है। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव लंबे समय से विभाग में डिजिटल कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे थे, जिसके परिणाम अब धरातल पर उतरने लगे हैं।

क्या है ‘वमिस’ (WAMIS) और कैसे करेगा काम?

​भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन प्रतिष्ठित संस्थान सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित ‘वमिस’ एक एकीकृत (इंटीग्रेटेड) डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इस प्रणाली के तहत किसी भी निर्माण कार्य के शुरू होने से लेकर उसके पूर्ण होने तक के पूरे जीवन-चक्र को ऑनलाइन संचालित किया जाएगा।

​इस एक ही प्लेटफॉर्म पर निम्नलिखित कार्य सुगमता से संपन्न होंगे:

  • प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियां
  • ई-प्राक्कलन (e-Estimate) और लागत का ऑनलाइन निर्धारण
  • ई-प्रोक्योरमेंट (निविदा प्रक्रिया) का एकीकरण
  • ई-मेजरमेंट बुक (e-MB) यानी मापन पुस्तिका का डिजिटलीकरण
  • ठेकेदारों के बिलों की ऑनलाइन तैयारी और त्वरित भुगतान
  • मासूम लेखा, कैशबुक और बजट प्रबंधन
  • जियो-टैग्ड फोटो के साथ गुणवत्ता और भौतिक प्रगति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

जनता और ठेकेदारों को मिलेंगे ये बड़े फायदे

    1. पारदर्शिता और जवाबदेही: हर कार्य की स्वीकृति, टेंडर, माप और भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से गड़बड़ी की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। मानवीय हस्तक्षेप कम होने से नियमों का पालन कड़ाई से होगा।
    2. समयबद्ध भुगतान: ठेकेदारों के देयकों की ऑनलाइन प्रक्रिया से बिल भुगतान में होने वाली देरी रुकेगी, जिससे अधोसंरचना विकास के प्रोजेक्ट्स तय समय-सीमा के भीतर गति पकड़ेंगे।
    3. रियल-टाइम मॉनिटरिंग: वरिष्ठ अधिकारी अब घर बैठे या कार्यालय से ही राज्यभर के निर्माण कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति पर सीधी नजर रख सकेंगे।
    4. बेहतर वित्तीय प्रबंधन: महालेखाकार कार्यालय को भेजे जाने वाले मासिक लेखा विवरण स्वतः तैयार होंगे और विभागीय परिसंपत्तियों का मजबूत डेटाबेस तैयार होने से भविष्य की नीतियों के निर्धारण में मदद मिलेगी।

मंत्री की दो टूक:

“शासन का स्पष्ट संकल्प है कि जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बनने वाला प्रत्येक निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता का हो और निर्धारित समय-सीमा में पूरा हो। ‘वमिस’ के लागू होने से लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह बनेगी।”

— श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री, छत्तीसगढ़

 

अन्य विभागों में भी होगा विस्तार

​फिलहाल इस अत्याधुनिक प्रणाली को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लोक निर्माण विभाग में लागू किया जा रहा है, जिसकी सफलता के बाद राज्य के अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य में गुड गवर्नेंस (सुशासन) की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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Bilaspur Bulletin

Editor in chief
Kamal kumar gupta
BJMC ,MJMC, ph,D (per)

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