रायपुर — छत्तीसगढ़ के राजस्व अभिलेखों को अब दफ्तरों की धूल और दीमक से मुक्ति मिलने जा रही है। राज्य सरकार के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने नागरिकों को सुगम, पारदर्शी और त्वरित सेवाएं देने के लिए ‘वसुंधरा’ (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना का आगाज़ कर दिया है।
इस योजना की नींव दंतेवाड़ा जिले के उस सफल प्रयोग पर रखी गई है, जहाँ बीते एक साल में 12,000 से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का उपयोग किया, 15,000+ जाति प्रमाण-पत्र 1–2 दिनों में बने और सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निपटारा हुआ—वहाँ रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आंकड़ा शून्य रहा।
महाअभियान का विस्तृत खाका (लक्ष्य और बजट)
राज्य भर में लगभग 12.89 करोड़ पृष्ठों के पुराने व वर्तमान राजस्व अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। इस पर कुल ₹65.41 करोड़ का CAPEX (पूंजीगत लागत) और ₹50 लाख प्रति वर्ष OPEX खर्च होगा, जिसकी फंडिंग राज्य अधोसंरचना मद और केंद्र की DILRMP 3.0 योजना से होगी।
- खसरा पांचसाला: 5.68 करोड़ पृष्ठ (लागत: ₹22.72 करोड़)
- B-1 रिकॉर्ड: 2.94 करोड़ पृष्ठ (लागत: ₹11.77 करोड़)
- नामांतरण व संशोधन पंजी: 2.49 करोड़ पृष्ठ (लागत: ₹9.98 करोड़)
- मिसल पंजी: 53.16 लाख पृष्ठ (लागत: ₹2.13 करोड़)
- अधिकार अभिलेख: 47.29 लाख पृष्ठ (लागत: ₹1.89 करोड़)
- अन्य दस्तावेज़: निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट और व्यवर्तन पंजी भी सुरक्षित होंगे।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च से दशकों पुराने रिकॉर्ड सेकंडों में खोजे जाएंगे।
- अभेद्य सुरक्षा: ब्लॉकचेन तकनीक, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR/बारकोड से हेरफेर की गुंजाइश खत्म होगी।
- समय की बचत: नकल के लिए 3 से 7 दिन भटकने की मजबूरी खत्म; 24×7 ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क से मिनटों में प्रमाणित दस्तावेज मिलेंगे।
अगला कदम: NIC (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) के सहयोग से आगामी 3 महीनों में पोर्टल/ऐप तैयार होगा और एक साल के भीतर शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण व सत्यापन का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।



