रायपुर — छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में जगदलपुर एनआईए (NIA) विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 10 दोषी माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे ‘न्याय की जीत’ करार दिया है।
- इतिहास का पीड़ादायक अध्याय: सीएम साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि यह हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य हिंसा में राज्य ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को खोया था।
- केंद्र सरकार के नेतृत्व की सराहना: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के “लौह संकल्प” और दृढ़ नेतृत्व के बदौलत ही आज छत्तीसगढ़ सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है।
- बस्तर में शांति और विकास का नया युग: दशकों तक माओवादी हिंसा की मार झेल रहा बस्तर क्षेत्र अब आतंक की साया से निकलकर शांति, आपसी विश्वास और विकास के नए रास्ते पर अग्रसर है।
- वैचारिक समर्थकों को आत्मचिंतन की नसीहत: सीएम साय ने कड़े शब्दों में कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए आत्मचिंतन का समय है जो जनजाति समाज के नाम पर राजनीति करते हैं और आतंक को बौद्धिक व वैचारिक समर्थन देते हैं।
श्रद्धांजलि और न्याय की मांग पूरी
इस क्रूर हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी दिवंगत नेताओं, सुरक्षाबलों के जवानों और नागरिकों को मुख्यमंत्री ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। साथ ही, एनआईए द्वारा इस जटिल मामले की जांच को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुँचाए जाने की भी सराहना की गई है।
घटना एक नजर में:
- घटना: झीरम घाटी नरसंहार
- अदालत: जगदलपुर एनआईए कोर्ट
- फैसला: 10 दोषी माओवादियों को मृत्युदंड
- दिनांक: 16 सितंबर 2026
इस महत्वपूर्ण कानूनी फैसले के बाद से प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसे न्यायपालिका और शासन की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।



