बिलासपुर -अधिकारियों की गैर-मौजूदगी और सवालों के घेरे में काम
नगर निगम के सुस्त रवैये और मनमानी निर्माण कार्यों की फेहरिस्त में एक और मामला जुड़ गया है। पंचवटी कॉलोनी राजकिशोर नगर में रविवार के दिन छुट्टी के आड़ में नियमों को ताक पर रखकर सड़क निर्माण का कार्य धड़ल्ले से कराया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि मौके पर नगर निगम का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या अवर अभियंता (इंजीनियर) दूर-दूर तक मौजूद नहीं है। स्थानीय नागरिकों और जानकारों के अनुसार, बिना किसी प्रशासनिक देखरेख के चल रहा यह काम सीधे तौर पर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
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ठेकेदार के रिश्तेदार के हाथों में कमान, कंक्रीट के ग्रेड का अता-पता नहीं
मौके की पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि सड़क निर्माण का जिम्मा किसी तकनीकी विशेषज्ञ या सुपरवाइजर के पास नहीं, बल्कि ठेकेदार के रिश्तेदार मनीष सिंह ‘किट्टू’ संभाल रहे हैं। जब उनसे मौके पर इस्तेमाल हो रही निर्माण सामग्री और कंक्रीट के ग्रेड को लेकर सवाल किया गया, तो वे इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। जिस व्यक्ति को यह तक नहीं मालूम कि सड़क निर्माण में किस ग्रेड (प्रिस्क्राइबड् मिक्स्ड रेशियो) की कंक्रीट का उपयोग होना चाहिए, उसकी देखरेख में इतनी महत्वपूर्ण सड़क का बनना जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है।
संसाधनों की भारी कमी और घंटों पड़े कंक्रीट से घटती मजबूती
निर्माण स्थल पर मानकों की धज्जियां उड़ाने की बानगी इस बात से साफ है कि एक साथ पांच ट्रैक्टर ट्रॉली माल (कंक्रीट) सड़क पर गिरा दिया गया है, जबकि उसे फैलाने के लिए बमुश्किल केवल एक लेबर मौके पर मौजूद है। तकनीकी विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि ट्रांजिट या ट्रैक्टर से गिराए जाने के बाद यदि कंक्रीट लंबे समय तक खुले में यूं ही पड़ी रहे, तो उसका इनिशियल सेटिंग टाइम (Initial setting time) प्रभावित होने लगता है। ऐसे में घंटों धूप और हवा में पड़े रहने वाली कंक्रीट की वह पकड़ और मज़बूती कभी हासिल नहीं हो सकती, जो एक मजबूत और टिकाऊ सड़क के लिए अनिवार्य होती है।
इस गंभीर अनियमितता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर संवेदकों (ठेकेदारों) और विभागीय मिलीभगत के चलते शहर की बुनियादी संरचनाओं के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद नगर निगम के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं या कागजी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।
संबंधित इंजीनियरों को निर्देशित किया जा रहा है कि सभी काम मानक मात्रा के अनुरूप हो और मौके में जाके स्थिति का जायजा ले ।कोर टेस्ट कराया जाएगा ।
भूपेंद्र उपाध्याय (जोन कमिश्नर ) नगर निगम जोन क्रमांक 07



