छत्तीसगढ़ में डिजिटल न्याय व्यवस्था पर राज्य स्तरीय कार्यशाला कल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा करेंगे शुभारंभ
रायपुर : न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से लैस कर इसे अधिक सरल, सुगम, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में आज रायपुर के होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। “नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना” विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला का उद्देश्य न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन तंत्र के बीच समन्वय को मजबूत करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा, जबकि अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा करेंगे।
गरिमामयी उपस्थिति
इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में कई दिग्गज हस्तियां शामिल हो रही हैं:
- विशिष्ट अतिथि: उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, और न्यायमूर्ति श्री चंद्रवंशी।
- अन्य सहभागिता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीशगण भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु और चर्चा के विषय
कार्यक्रम में मुख्य रूप से इन अत्याधुनिक तकनीकी प्रणालियों और पहलों पर मंथन किया जाएगा:
- आईसीजेएस (ICJS): अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली।
- सीसीटीएनएस (CCTNS): अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली।
- डिजिटल न्यायिक समन्वय: न्याय और पुलिस व्यवस्था का संपूर्ण डिजिटलीकरण।
- तकनीकी एकीकरण: नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तकनीकी समाधान।
कौन-कौन ले रहा है हिस्सा?
इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारी, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस महानिरीक्षक (IG), पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित पुलिस एवं न्यायिक तंत्र के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वरिष्ठ विशेषज्ञ कार्यशाला के दौरान तकनीकी प्रशिक्षण और विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे।
न्याय व्यवस्था के लिए मील का पत्थर
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कार्यशाला नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को गति देने और आम नागरिकों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से त्वरित और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।