जनादेश का सम्मान लोकतंत्र की पहली शर्त – पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर
बेलतरा में ‘राष्ट्र चिंतन’ संगोष्ठी

बिलासपुर (मनोज वर्मा )
भारतीय जनता पार्टी विधानसभा बेलतरा की ओर से ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय (सरकंडा) में ‘राष्ट्र चिंतन (बौद्धिक संवाद)’ प्रबुद्धजन संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री व वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला मुख्य रूप से शामिल हुए। संगोष्ठी में लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और राष्ट्रहित के विषयों पर गहन वैचारिक मंथन किया गया।

ईवीएम को लेकर कांग्रेस पर तीखा प्रहार
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार मिलने पर ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना कांग्रेस की दोहरी राजनीति को दर्शाता है।
”जब ईवीएम के जरिए कांग्रेस खुद सत्ता में आती है, तब कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन परिणाम पक्ष में न आने पर संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाए जाते हैं। लोकतंत्र में ऐसे दोहरे मापदंड स्वीकार्य नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत का लोकतंत्र अत्यंत परिपक्व है। विपक्ष का काम केवल विरोध करना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाना है।

लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, मर्यादाओं का विषय: सुशांत शुक्ला
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक मर्यादाओं और जनता के जनादेश के सम्मान से मजबूत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए समाज में भ्रम और अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश आज विकास और सुशासन के पथ पर अग्रसर है, ऐसे में सभी दलों को संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सोचना चाहिए।
कार्यक्रम में पद्मश्री रामलाल बरेठ, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, जनक देवांगन सहित विभिन्न क्षेत्रों—चिकित्सा, विधि, वित्त, सहकारिता, कृषि और सामाजिक संगठनों के प्रमुख प्रबुद्धजनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। संगोष्ठी का मुख्य संदेश यही रहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर निराधार सवाल खड़े करना उचित नहीं है। देश को आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि सकारात्मक विचारों और जिम्मेदार राजनीति की आवश्यकता है।
