रायपुर (मनोज वर्मा )
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालांकि, विकट परिस्थितियों के बीच राज्य शासन और जिला प्रशासन की तत्परता ने एक बड़ा संकट टाल दिया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने दिन-रात एक कर अब तक 16,074 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए बस्तर और बीजापुर के दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली गई।
बाढ़ से जुड़े मुख्य आंकड़े और प्रभाव
प्रदेश के 571 गाँवों के 22,377 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की सक्रियता के चलते इनमें से 16,074 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। बेघर हुए और प्रभावित लोगों के लिए कुल 173 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहाँ वर्तमान में 17,540 लोग शरण लिए हुए हैं।
सतत निगरानी के बीच इन राहत शिविरों में लोगों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और जरूरी दवाइयों की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी तरह की बीमारी या संक्रमण से बचा जा सके।
संपत्ति और फसलों के नुकसान का आकलन
लगातार पानी भरने से जनजीवन के साथ-साथ संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुँचा है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, 199 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं, जबकि 1,155 घरों को आंशिक क्षति पहुँची है। राजस्व विभाग की टीमें मैदान में उतरकर मकानों और अन्य संपत्तियों के नुकसान का त्वरित आकलन कर रही हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि आरबीसी 6-4 (RBC 6-4) के प्रावधानों के तहत पात्र परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा।
दुखद हादसे और प्रशासन के निर्देश
इस प्राकृतिक आपदा में 8 लोगों की अकाल मृत्यु और 172 पशुओं की मौत की बेहद दुखद सूचना भी मिली है। शासन ने संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पीड़ित परिवारों को नियमानुसार फौरन राहत राशि और हरसंभव संबल प्रदान करें।
राज्य शासन स्तर पर पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सरकार की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे हर आखिरी व्यक्ति तक मदद पहुँचाना, राहत शिविरों में बेहतरीन सुविधाएँ देना और नुकसान की भरपाई कर जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है।
