मुंगेली/बिलासपुर: जहां बाघों की दहाड़ होनी चाहिए थी, वहां भ्रष्टाचार की फुसफुसाहट चल रही थी। अचानकमार टाइगर रिजर्व की सुरही रेंज में ‘सेटिंग’ का खेल खेल रहे अफसरों को एसीबी (ACB) ने रंगे हाथ पकड़कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। कानून की सौदेबाजी कर रहे रेंजर और डिप्टी रेंजर अब खुद कानून के शिकंजे में हैं।
रील से शुरू हुआ मामला, रिश्वत पर खत्म
पूरा मामला दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था, जब लोरमी निवासी अजीत कुमार वैष्णव ने एयर गन के साथ एक रील बनाई थी। रील वायरल हुई तो वन विभाग ने कार्रवाई की और अजीत को 18 दिन जेल की हवा खानी पड़ी। असली खेल जेल से छूटने के बाद शुरू हुआ:
मांग: जप्त वाहन छोड़ने और चालान पेश करने के नाम पर 70 हजार रुपये की डिमांड की गई।
दबाव: डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव ने डराया कि कोर्ट केस में 4-5 लाख का खर्च आएगा।
शिकायत: प्रार्थी अजीत ने झुकने के बजाय एसीबी बिलासपुर का दरवाजा खटखटाया।
रेस्टोरेंट में बिछाया जाल, रंगे हाथ पकड़े गए रेंजर
एसीबी के डीएसपी अजितेश सिंह के नेतृत्व में जाल बुना गया। 26 मार्च 2026 को कोटा के ‘मित्र मिलन रेस्टोरेंट’ में जैसे ही डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये थामे, वैसे ही टीम ने दबिश दे दी।
बड़ी कार्रवाई: मौके पर रेंजर पल्लव नायक भी मौजूद था। जांच में पाया गया कि रिश्वत की मांग में उसकी भी मिलीभगत थी। टीम ने रंगे हाथ पैसे बरामद कर दोनों को हिरासत में ले लिया
कानूनी कार्रवाई और एसीबी का स्ट्राइक रेट
आरोपी का नाम पद धारा (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम)
मनीष श्रीवास्तव डिप्टी रेंजर धारा 7
पल्लव नायक रेंजर धारा 7 और 12
यह एसीबी बिलासपुर की पिछले दो वर्षों में 45वीं ट्रैप कार्रवाई है। इस घटना ने वन विभाग के भीतर मचे भ्रष्टाचार और ‘सेटिंग’ के तंत्र को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
एसीबी की अपील: यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी आपसे काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो डरे नहीं, तुरंत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सूचित करें। आपकी एक पहल तंत्र को साफ कर सकती है।

