बिलासपुरसीपत

​साहब का AC रूम भी फेल! जब 45 डिग्री की आग में 22 दिनों से जनता गा रही है- ‘भ्रष्टाचारियों तुम्हारा क्या होगा कालिया?’

​🔥 बिलासपुर में फूटा जन-आक्रोश: आसमान से बरस रही आग, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं डिगे हौसले; एजीएम के घमंड को जनता की खुली चुनौती!

​बिलासपुर (सीपत)। एनटीपीसी (NTPC) सीपत में चल रहे अरबों-खरबों रुपये के राखड़ परिवहन (Fly Ash Transportation) घोटाले के खिलाफ क्षेत्र की जनता ने इतिहास का सबसे कड़ा मोर्चा खोल दिया है। 1 मई से शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन आंदोलन को आज पूरे 22 दिन हो गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय बिलासपुर में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है, आसमान से आग बरस रही है और लू के थपेड़े चल रहे हैं। इस जानलेवा और रिकॉर्डतोड़ गर्मी में भी जनपद सदस्य रेवाशंकर साहू (जनपद सदस्य 08, मस्तूरी थाना) के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण, बुजुर्ग और नौजवान बिना झुके, बिना थके अनवरत मोर्चे पर डटे हुए हैं। जनता का यह फौलादी इरादा एनटीपीसी प्रबंधन के पसीने छुड़ा रहा है।

​🛑 45 डिग्री की तपिश से बड़ा है जनता का आक्रोश, फिर भी प्रशासन मौन क्यों?

​बिना गाड़ियां चले, सिर्फ फर्जी जीपीएस (GPS) और फर्जी फास्टैग (FASTag) के दम पर कागजों में अरबों रुपये का वारा-न्यारा करने का यह खेल बिलासपुर के इतिहास का सबसे शातिर घोटाला माना जा रहा है।

  • ​तपती धूप में आंदोलन: आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि चाहे तापमान 45 डिग्री हो या 50 डिग्री, जब तक एनटीपीसी प्रबंधन घुटने नहीं टेकता और 24 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा।
  • ​प्रशासनिक संवेदनहीनता: हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी भीषण गर्मी में जनता सड़कों पर है और देश की इतनी बड़ी महारत्न कंपनी में 22 दिनों से कामकाज प्रभावित है, फिर भी जिला प्रशासन और एनटीपीसी का शीर्ष प्रबंधन इस महा-घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश में मूकदर्शक बना बैठा है।

​🤬 ‘पहुंच’ के घमंड में चूर अधिकारी बनाम सड़कों पर तपती जनता

​आंदोलन के इतने लंबे खींचने की एक बड़ी वजह एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारी ए.जी.एम. अनन्त वासने का अड़ियल और तानाशाही रवैया है। आरोप है कि शुरुआत में जब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई गई, तो एजीएम ने बंद कमरों के एसी (AC) में बैठकर सीधे लहजे में धमकी दी थी कि—

​“हमारी पहुंच बहुत लंबी है, तुम लोग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”

 

  • ​जनता का पलटवार: जनता ने अधिकारी के इस बंद कमरों वाले घमंड को 45 डिग्री की चिलचिलाती धूप में चुनौती दी है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अधिकारी की पहुंच चाहे जहां तक हो, वो इस तपती धूप में बैठी जनता की सामूहिक ताकत से बड़ी नहीं हो सकती।

​⚔️ अब और बड़े आंदोलन की तैयारी: ये हैं मुख्य मांगें

​आंदोलन के 22वें दिन भी आंदोलनकारी अपनी मुख्य मांगों पर अड़े हुए हैं:

  1. ​हाई-लेवल निष्पक्ष जांच: फर्जी जीपीएस और फास्टैग के जरिए वेंडरों और अधिकारियों की साठगांठ की उच्च स्तरीय जांच हो।
  2. ​दागी ठेकेदारों पर बैन: कागजी परिवहन करने वाले सभी दागी वेंडर्स के टेंडर तुरंत निरस्त किए जाएं।
  3. ​एजीएम पर सख्त कार्रवाई: धमकी देने वाले और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले अधिकारी को तत्काल पद से हटाया जाए।

​🛑 बड़ा अल्टीमेटम!

​22 दिनों के शांतिपूर्ण लेकिन बेहद कठिन आंदोलन के बाद अब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट रहा है। आंदोलनकारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि इस महा-घोटाले पर जिला प्रशासन ने तुरंत कोई सख्त कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन किसी भी वक्त और बड़ा रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एनटीपीसी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

इस विषय में बाइट के लिए मस्तूरी एसडीएम शिव कुमार कंवर को फोन किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया

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