बिलासपुर, 27 फरवरी 2026। सीपत थाना पुलिस ने ग्राम जेवरा जंगल से सागौन लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस को 26 फरवरी की रात सूचना मिली थी कि जेवरा जंगल से सागौन के पेड़ काटकर लकड़ी पिकअप वाहन में भरकर जांजगीर-चांपा जिले की ओर ले जाई जा रही है। सूचना पर तत्काल टीम गठित कर घेराबंदी की गई। जांच के दौरान पिकअप वाहन क्रमांक CG-11 AB-0612 को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें 16 नग सागौन के लट्ठे बरामद हुए। मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
जब्त सामग्री
16 नग सागौन लकड़ी (कीमत लगभग ₹65,827)
डीजल आरा मशीन मय ब्लेड (कीमत ₹6,000)
पिकअप वाहन (कीमत ₹1,50,000)
कुल जब्ती: ₹2,21,827
गिरफ्तार आरोपी
रामचंद कुर्रे (41 वर्ष), निवासी बिरगहनी, थाना बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा
संतोष कुमार (50 वर्ष), निवासी बिरगहनी, थाना बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा
जय सिंह ओगरे (62 वर्ष), निवासी ठरगा बहरा, थाना बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा
लिल्लू राम पटेल (56 वर्ष), निवासी महुदा, थाना बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा
रघुवीर सिंह मरावी (40 वर्ष), निवासी महुदा, थाना बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा
फॉरेस्ट विभाग पर उठे सवाल
मामला वन क्षेत्र से जुड़ा होने के बावजूद पूरी कार्रवाई पुलिस ने की। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर जंगल से सागौन की कटाई हो रही थी और फॉरेस्ट विभाग को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि समय रहते निगरानी की जाती तो पेड़ों की कटाई रोकी जा सकती थी। वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है, ऐसे में विभाग की निष्क्रियता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
हालांकि इस संबंध में फॉरेस्ट विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सीपत पुलिस की तत्परता से अवैध लकड़ी तस्करी का मामला उजागर हुआ है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई करता है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।

