सीआईएल चेयरमैन बी. साईराम ने किया एसईसीएल कुसमुंडा खदान का दौरा, उत्पादन बढ़ाने और लक्ष्यों को समय पर पूरा करने पर जोर

कोरबा / बिलासपुर:
कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के चेयरमैन बी. साईराम ने रविवार को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा खदान का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खदान के विभिन्न पैचों का जायजा लिया और चालू वित्तीय वर्ष के संशोधित उत्पादन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना पर अधिकारियों के साथ मंथन किया।

खदान के विभिन्न हिस्सों का किया मैराथन दौरा
दौरे की शुरुआत में चेयरमैन बी. साईराम ने व्यू पॉइंट से कुसमुंडा खदान की विशाल खनन गतिविधियों का सीधा अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने:
विभागीय माइनिंग पैच का दौरा कर वहां चल रहे कोयला उत्पादन कार्यों की जानकारी ली।
केएनआर (KNR) के नए कॉन्ट्रैक्ट पैच का निरीक्षण किया और वहां की प्रगति की समीक्षा की।
नीलकंठ फेस पर पहुंचकर कोल फेस की स्थिति, ओवरबर्डन रिमूवल (OBR) और खनन गतिविधियों का बारीकी से जायजा लिया।
उत्कृष्ट कर्मियों की हौसलाफजाई
फील्ड निरीक्षण के दौरान चेयरमैन ने खदान में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे कर्मियों और ऑपरेटरों से सीधा संवाद किया। उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित कर उनकी पीठ थपथपाई और उनका मनोबल बढ़ाया।
अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक
फील्ड विजिट के बाद कुसमुंडा क्षेत्र के सभागार में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
इस दौरान एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी/संचालन) रमेश चन्द्र महापात्र, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) नृपेन्द्र नाथ सहित क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी और संविदा एजेंसियों (कॉन्ट्रैक्टर) के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
उत्पादकता में वृद्धि: कोयला उत्पादन और ओबीआर (OBR) के निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करना।
चुनौतियों का समाधान: परिचालन में आ रही बाधाओं और तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाना।
बेहतर समन्वय: कंपनी प्रबंधन और कॉन्ट्रैक्ट एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाकर उत्पादन की रफ्तार को और तेज करना।
चेयरमैन बी. साईराम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कुसमुंडा जैसी महत्वपूर्ण मेगा परियोजनाओं की भूमिका अहम है, इसलिए सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उत्पादन और उत्पादकता के नए आयाम स्थापित किए जाएं।
