दुर्ग भिलाई

आईआईटी भिलाई और एनएचआरसी करेंगे मानवाधिकार, एआई और पर्यावरण पर रणनीतिक सहयोग

​भिलाई, छत्तीसगढ़ — भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत सरकार ने शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नई दिशा देने की पहल की है। एनएचआरसी के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी के आईआईटी भिलाई प्रवास के दौरान इस रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।

  • ​पाठ्यक्रम में बदलाव: प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने इंजीनियरिंग और विज्ञान के मुख्य पाठ्यक्रम में मानवाधिकारों तथा पर्यावरण अध्ययन को अनिवार्य रूप से शामिल करने पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थी भविष्य की सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
  • ​संस्थानों के बीच एमओयू: एनएचआरसी, आईआईटी भिलाई और अन्य प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव रखा गया।
  • ​एआई और मानवाधिकार: छत्तीसगढ़ में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विशेष एप्लिकेशन विकसित करने की योजना पर विचार किया गया।
  • ​ह्यूमन राइट्स एंड हैप्पीनेस क्लब: मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आईआईटी भिलाई के ‘हैप्पीनेस क्लब’ का नाम बदलकर ‘ह्यूमन राइट्स एंड हैप्पीनेस क्लब’ करने का सुझाव दिया गया।
  • ​राष्ट्रीय इनोवेशन फेयर: देश भर के आईआईटी और एनआईटी के विद्यार्थियों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर के इनोवेशन फेयर के आयोजन का प्रस्ताव भी रखा गया।

​भविष्य की दिशा:

​आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश एवं संस्थान के डीन-मंडल ने प्रो. त्रिपाठी का स्वागत किया और संस्थान की पहलों की जानकारी दी। संस्थान ने एनएचआरसी के मार्गदर्शन में मानवाधिकार और पर्यावरण पर एक विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने में गहरी रुचि दिखाई है। इस सहयोग से ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को बल मिलने की उम्मीद है।

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