सीपत

एनटीपीसी सीपत का काला सच: ‘मौत की फैक्ट्री’ बन चुका है प्लांट, लाचार संविदा कर्मी की जान के बाद मचा कोहराम!

सीपत (बिलासपुर): एनटीपीसी सीपत… नाम ‘महारत्न’ का, लेकिन काम किसी श्मशान घाट से कम नहीं! आज उज्ज्वलनगर टाउनशिप के पंप हाउस में संविदा कर्मी प्रभात कुमार यादव की फंदे से लटकी लाश ने एक बार फिर एनटीपीसी के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें वे ‘सुरक्षा’ और ‘मानकों’ की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।

​प्रबंधन और ठेका कंपनी की क्या ‘मिलीभगत’ से हो रही मौतें ?

​इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि एनटीपीसी के भीतर ‘ठेका प्रथा’ के नाम पर मजदूरों का शोषण हो रहा है। जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र धीवर ने इस घटना को ‘संस्थागत हत्या’ करार देते हुए कहा कि आखिर एनटीपीसी में लगातार मौतें क्यों हो रही हैं?

​राजेंद्र धीवर ने प्रबंधन और ठेका कंपनी की क्लास लगाते हुए सीधा हमला बोला:

  • ​साइट इंचार्ज पर दर्ज हो FIR:  धीवर ने दहाड़ते हुए कहा कि ठेका कंपनी (न्यू इंडिया इंजीनियरिंग कंपनी) और वहां के साइट इंचार्ज की लापरवाही से एक घर का चिराग बुझ गया है। इन्हें सिर्फ मुनाफा कमाने से मतलब है, मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं! इन पर तत्काल गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।
  • ​पंप हाउस ‘मौत का कुआं’ क्यों बना?  सीपत सरपंच प्रतिनिधि योगेश वंशकार ने कहा कि आखिर उस पंप हाउस को खुला किसने छोड़ा? सुरक्षा के दावे करने वाली सीआईएसएफ और एनटीपीसी का मैनेजमेंट उस वक्त कहां सो रहा था? यह लापरवाही नहीं, सीधे-सीधे अपराधिक कृत्य है।
  • ​प्रबंधन की संवेदनहीनता: जनपद पंचायत सभापति मनोज खरे ने कहा कि घटना के बाद से ही एनटीपीसी का प्रबंधन बिलों में दुबक गया है। क्या अब पीड़ित परिवार को सड़क पर उतरना पड़ेगा?

​‘मुआवजा और नौकरी’ – यह भीख नहीं, हक है!

भाजपा मंडल उपाध्यक्ष अभिलेष यादव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि एनटीपीसी प्रबंधन अपनी जेब से पैसा नहीं दे रहा है, यह मजदूरों के खून-पसीने की कमाई से चलने वाली कंपनी है। उन्होंने मांग की है कि:

​“अगर प्रबंधन ने मृतक परिवार को तत्काल उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी नहीं दी, तो सीपत की जनता एनटीपीसी के गेट को ताला जड़ देगी। इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं चलेगा, आर-पार की लड़ाई होगी!”

 

​सवाल सिस्टम पर:

​क्या एनटीपीसी सीपत सिर्फ मौतों का आंकड़ा बढ़ाने के लिए रह गया है? ठेका कंपनियों के भ्रष्टाचार और मैनेजमेंट की अनदेखी कब तक निर्दोष मजदूरों की जान लेती रहेगी? बिलासपुर का प्रशासन अब इस मामले में चुप्पी तोड़ेगा या फिर एनटीपीसी के दबाव में आकर दोषियों को ‘क्लीन चिट’ देगा?

​सीपत की जनता अब जवाब चाहती है—इंसाफ या आंदोलन!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
login
Wtsp
Search
Insta
CONTACT
error: Content is protected !!