रायपुर : जिला न्यायालय रायपुर में आज आयोजित ‘विशेष लोक अदालत’ न्याय के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुई। चेक बाउंस (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम) से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए आयोजित इस विशेष सत्र में पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से 847 मामलों का सफल निराकरण किया गया। इस पहल के माध्यम से कुल 22 करोड़ 79 लाख 86 हजार 157 रुपये की समझौता राशि का निपटारा हुआ, जिससे सैकड़ों परिवारों और व्यापारियों को लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों से राहत मिली है।
19 विशेष खण्डपीठों का गठन और हाईब्रिड मोड का कमाल
राष्ट्रीय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया।
अदालत में सुगम न्याय सुनिश्चित करने के लिए 19 विशेष खण्डपीठों का गठन किया गया था, जिनमें लगभग 1800 प्रकरण रखे गए थे। इस बार ‘हाईब्रिड मोड’ (भौतिक और वर्चुअल उपस्थिति) की सुविधा होने के कारण पक्षकारों को अपनी सुविधानुसार उपस्थित होने का विकल्प मिला, जिसने मामलों के त्वरित निपटारे में अहम भूमिका निभाई।
क्यों खास है लोक अदालत का निर्णय?
विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालत के जरिए सुलझाए गए मामले न केवल समय और धन की बचत करते हैं, बल्कि समाज में सद्भाव भी बढ़ाते हैं:
- अंतिम निर्णय: लोक अदालत में पारित आदेश अंतिम होता है, जिसमें अपील का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे विवाद का स्थायी समाधान हो जाता है।
- कटुता की समाप्ति: आपसी राजीनामे से दोनों पक्षों के बीच की कटुता और वैमनस्यता समाप्त होती है।
- सुविधाजनक: हाईब्रिड प्रणाली के कारण दूरदराज के पक्षकार भी आसानी से जुड़ पा रहे हैं, जिससे निराकृत होने वाले मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा, अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) विनय प्रधान, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद कुमार सिंह और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अविनाश कुमार दुबे सहित अनेक न्यायविद उपस्थित रहे।


