रायपुर:
शिक्षक दिवस के अवसर पर लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार और चार शिक्षकों को स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विकास में शिक्षा की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- शिक्षाविदों का सम्मान: महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा का उद्देश्य व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
- शून्य शिक्षकविहीन स्कूल: पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके तहत युक्तियुक्तकरण के बाद अब प्रदेश में एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है।
- स्थानीय भाषा और समावेशी शिक्षा: बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज हो गई है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- आधुनिक बुनियादी ढांचा: प्रदेश के 341 विद्यालयों को ‘पीएम श्री योजना’ के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। साथ ही, स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 नए विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं और शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को पूरा किया गया है।
- दूरस्थ अंचलों में शिक्षा का विस्तार: बस्तर के संवेदनशील क्षेत्रों जैसे ओरछा और जगरगुंडा में ‘एजुकेशन सिटी’ विकसित की जा रही है ताकि दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर मिल सकें।
- विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य: वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लक्ष्य को पाने में शिक्षा विभाग और शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम होगी।
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने भी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और AI के दौर में तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने आगामी वर्ष 2026-27 के लिए 64 चयनित शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।



