बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की ऐतिहासिक ध्वजा यात्रा: माँ महामाया के दरबार में पावन ध्वजा अर्पण के साथ कल होगा समापन

लोफन्दी से रानीगांव तक छठवें दिन उमड़ा आस्था का सैलाब, मातृशक्ति ने फूलों और रंगोली से किया भव्य स्वागत
लक्षनपुर में विधायक सुशांत शुक्ला ने किया ₹10 लाख के विकास कार्यों का लोकार्पण
रतनपुर माँ महामाया मंदिर में होगा भव्य समापन, 48 से अधिक ग्राम पंचायतों से गुजरी है यात्रा
बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में निकाली जा रही शारदीय नवरात्रि की भव्य ध्वजा यात्रा अब अपने अंतिम और सातवें पड़ाव की ओर अग्रसर है। सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और अटूट जनआस्था का संदेश देने वाली यह सात दिवसीय पदयात्रा कल रतनपुर स्थित माँ महामाया के दरबार में पावन ध्वजा अर्पण के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न होगी।

छठवें दिन श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम
यात्रा के छठवें दिन बेलतरा क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। लोफन्दी, लक्षनपुर, गोंदईया और रानीगांव में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई:
लोफन्दी में पुष्प वर्षा: यात्रा के लोफन्दी पहुँचने पर सरपंच अयोध्या देवांगन के नेतृत्व में ग्रामीणों और मातृशक्ति ने भव्य स्वागत किया। महिलाओं ने माता के रथ के मार्ग में फूल बिछाकर अनूठा अभिनंदन किया।
लक्षनपुर को विकास की सौगात: इस धार्मिक यात्रा के दौरान जनसेवा और आस्था का अनूठा समन्वय देखने को मिला। विधायक सुशांत शुक्ला ने लक्षनपुर में विधायक निधि से ₹10 लाख की लागत से बसीन पाट में निर्मित बाउंड्रीवॉल का लोकार्पण किया।
रंगोली और जसगीतों से सजा गोंदईया: ग्राम गोंदईया में महिलाओं ने घरों के सामने पारंपरिक रंगोली और अल्पना सजाकर माता का स्वागत किया। माँ महामाया के जसगीतों पर श्रद्धालु झूम उठे।
रानीगांव में जगराते की धूम: यात्रा के विश्राम स्थल रानीगांव में सचिन तिवारी एवं उनकी टीम द्वारा शानदार माता का जगराता प्रस्तुत किया गया, जिसमें क्षेत्रवासी देर रात तक भक्ति में लीन रहे।
कल रतनपुर में होगा भव्य समापन
सात दिनों तक बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की लगभग 48 ग्राम पंचायतों की परिक्रमा करने के बाद, कल सातवें दिन यह यात्रा रानीगांव से प्रारंभ होगी।
यात्रा मदनपुर, सिंघरी चौक, भैरव बाबा मंदिर और सिद्धि विनायक मंदिर से होते हुए रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर प्रांगण पहुँचेगी। यहाँ विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पावन ध्वजा अर्पित की जाएगी, जिसके साथ ही इस दिव्य और ऐतिहासिक धार्मिक महापर्व का समापन होगा।
गाँव-गाँव में युवाओं, मातृशक्ति और धर्मप्रेमियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने इस आयोजन को लोक-आस्था का एक ऐतिहासिक पर्व बना दिया है।
