बिलासपुरराजनीति

​₹500 का सिलेंडर अब सपना? पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने बिलासपुर से फूंका महंगाई के खिलाफ बिगुल, भाजपा की घेराबंदी तेज

​बिलासपुर। देश में महंगाई की मार झेल रही आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है, जो आज यानी 7 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब आम आदमी की रसोई के बजट को प्रभावित किया गया है।

​महंगाई पर राजनीतिक गर्माहट

​इस मूल्यवृद्धि को लेकर बिलासपुर के शिक्षाविद एवं पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस वृद्धि को जनता की जेब काटने वाली “चुपके-चुपके” की गई कार्रवाई बताया है।

​उन्होंने सरकार से तीखे सवाल करते हुए कहा:

  • ​विकल्पों की अनदेखी: जब रूस और ईरान जैसे देश भारत को सस्ती दरों पर ईंधन देने के लिए तैयार हैं, तो सरकार उनसे खरीद क्यों नहीं कर रही है?
  • ​आर्थिक कुप्रबंधन: उन्होंने तर्क दिया कि देश का मौजूदा आर्थिक संकट महज वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह वर्षों की गलत नीतियों, बेरोजगारी और आर्थिक कुप्रबंधन का नतीजा है।
  • ​बढ़ता बोझ: उन्होंने चेताया कि रसोई गैस के दाम बढ़ने से इसका सीधा असर दूध, खाद्य तेल और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी पड़ेगा, जिससे आम परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

​देश की आर्थिक स्थिति और आरबीआई का रुख

​एलपीजी की यह मूल्यवृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के दौर से गुजर रही है:

  • ​आरबीआई का आकलन: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया है, जबकि मुद्रास्फीति (CPI) का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।
  • ​वैश्विक कारण: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात और मुद्रा पर पड़ रहा है।
  • ​सीमित राहत: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के मुकाबले भारत में एलपीजी की कीमतें अभी भी कम हैं और तेल विपणन कंपनियां प्रत्येक सिलेंडर पर भारी नुकसान उठा रही हैं, जिसके चलते ये समायोजन किए जा रहे हैं।

​आम जनता पर असर

​विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ एलपीजी की बढ़ती कीमतों से परिवहन और विनिर्माण लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर ‘कोर इन्फ्लेशन’ (Core Inflation) पर पड़ेगा। शिक्षाविद श्री पाण्डेय के अनुसार, आम आदमी की आय स्थिर है या घट रही है, और बचत खत्म होने के कारण अधिकांश परिवार 18-20 हजार रुपये मासिक आय में गुजारा करने को मजबूर हैं। ऐसे में यह महंगाई आम आदमी के लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।

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