सिम्स बिलासपुर में ऐतिहासिक सफलता: पहली बार VATS तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन का सफल इलाज

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने चिकित्सा जगत में एक और मील का पत्थर छू लिया है। संस्थान में पहली बार आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक का उपयोग करते हुए फेफड़े के आसपास पानी भरने (टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन) से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया गया है। इस उपलब्धि से बिलासपुर और आसपास के क्षेत्र के मरीजों को अब जटिल फेफड़ों की बीमारियों के इलाज के लिए महानगरों या महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
क्या था पूरा मामला?
मरीज पिछले तीन महीनों से लगातार बुखार से पीड़ित था। शुरुआती दौर में स्थानीय निजी चिकित्सकों से टाइफाइड का इलाज कराने पर कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन बुखार फिर लौट आया। इसके बाद सोनोग्राफी और अन्य मेडिकल जांच में दाहिने फेफड़े के पास अत्यधिक मात्रा में पानी (राइट प्लूरल इफ्यूजन) होने की पुष्टि हुई।
मरीज को सिम्स के टीबी एवं चेस्ट विभाग में भर्ती किया गया, जहां जांच के बाद ट्यूबरक्लोसिस प्लूरल इफ्यूजन का पता चला और दवाइयां (ATT) शुरू की गईं। हालांकि, बार-बार प्लूरल टैपिंग (पानी निकालना) करने के बावजूद फेफड़े के आसपास पानी दोबारा जमा हो रहा था। गंभीर स्थिति को देखते हुए मामले को जनरल सर्जरी विभाग को रेफर किया गया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया कारनामा
जनरल सर्जरी, टीबी एवं चेस्ट, और एनेस्थीसिया विभाग के समन्वय से मरीज की अत्याधुनिक VATS सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
- ऑपरेशन में शामिल प्रमुख चिकित्सक: जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. कोमल प्रसाद देवांगन, डॉ. विनोद तमकनंद और डॉ. सुशील पात्रे।
- सहयोगकर्ता टीम: जूनियर रेजिडेंट डॉ. ऋतेश, डॉ. गरिमा शर्मा, टीबी चेस्ट विभाग से डॉ. अनिल डरसेना और उनकी टीम।
- एनेस्थीसिया प्रबंधन: एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति और उनकी टीम। ऑपरेशन थिएटर स्टाफ श्री अश्विनी का भी विशेष योगदान रहा।
सफल सर्जरी के बाद फेफड़े के पास जमा द्रव को सफलतापूर्वक निकाला गया और डिकॉर्टिकेशन व बायोप्सी की प्रक्रिया पूरी की गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और नियमित फॉलो-अप पर है।
आम जनता को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि संस्थान में VATS मशीन की उपलब्धता उनके और चिकित्सा अधीक्षक के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पहले ऐसे 10 से 12 मरीजों को प्रतिमाह बाहर रेफर करना पड़ता था, जो अब सिम्स में ही संभव हो गया है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने जानकारी दी कि निजी अस्पतालों में इस आधुनिक सर्जरी का खर्च 1 से 2 लाख रुपये तक आता है, जबकि सिम्स में यह सुविधा निर्धारित शासकीय शुल्क और आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों के लिए उपलब्ध है। इससे गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी आर्थिक और मानसिक राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों की सलाह: लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस फूलने या फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। समय पर सही जांच और आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक (VATS) से गंभीर बीमारियों का सुरक्षित इलाज संभव है।
