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विजयापुरम के 422 घरेलू सहायिकाओं का आंदोलन

बिलासपुर — अरपांचल  पॉश एरिया के विजयापुरम कॉलोनी से एक ऐसी खबर आई है जो शहर के रईस परिवारों की नींद उड़ा सकती है। यहाँ रसोई और साफ-सफाई की कमान संभालने वाली करीब 422 महिलाओं ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। झाड़ू-पोछा और खाना बनाने वाली इन महिलाओं ने साफ कह दिया है कि अब पुराने वेतन और बिना छुट्टी के वे काम नहीं करेंगी। अपनी मांगों को लेकर ये महिलाएं अब सड़कों पर उतर आई हैं, जिससे कॉलोनी के घरों में ‘किचन पॉलिटिक्स’ शुरू होने के आसार बढ़ गए हैं..

दरअसल घर-घर जाकर सेवाएं देने वाली इन महिलाओं के तेवर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। विजयापुरम कॉलोनी के 400 से अधिक घरों का कामकाज संभालने वाली इन श्रमिकों ने सामूहिक रूप से वेतन बढ़ोतरी की मांग बुलंद की है। अपमान और उपेक्षा की शिकार इन महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ‘काम करने वाली मशीन’ नहीं बल्कि ‘इंसान’ हैं। बढ़ती महंगाई ने इनके घर का बजट बिगाड़ दिया है, जिससे अब पुराने वेतन पर काम करना नामुमकिन हो गया है। इन महिलाओं ने दो-टूक कहा है कि उन्हें भी सम्मानजनक मजदूरी चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का पेट पाल सकें।अब जरा सोचिए, अगर ये महिलाएं सामूहिक हड़ताल पर चली गईं तो क्या होगा? घरों के सिंक बर्तनों से भर जाएंगे, कमरों में धूल की परत जमेगी और खाना बनाने की जिम्मेदारी खुद घर की महिलाओं पर आ जाएगी। इससे न केवल घर का मैनेजमेंट बिगड़ेगा, बल्कि काम के बोझ से पति-पत्नी के बीच झगड़े भी शुरू हो सकते हैं। आंदोलनकारी महिलाओं ने वेतन वृद्धि के साथ महीने में तीन अनिवार्य छुट्टियों की मांग रखी है। उनका कहना है कि बिना साप्ताहिक अवकाश के वे शारीरिक रूप से टूट रही हैं। अब गेंद मकान मालिकों के पाले में है—या तो मांगें मानिए या फिर खुद झाड़ू उठाने के लिए तैयार हो जाइए.।

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