नई दिल्ली | भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ऐतिहासिक ‘व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता’ (CETA) आज, 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। वाणिज्य विभाग के सचिव, श्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और ‘भारत-यूनाइटेड किंगडम रोडमैप 2030’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
व्यापार लक्ष्य और शुल्क-मुक्त पहुंच
भारत और यूके के बीच वर्तमान में लगभग 56 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है, जिसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इस समझौते के तहत, भारतीय सामानों को यूके में लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) पहुंच मिलेगी। इससे वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को वैश्विक बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
पेशेवरों के लिए बड़ी राहत: सामाजिक सुरक्षा में छूट
सीईटीए के साथ ही ‘दोहरी अंशदान संधि’ (Double Contribution Convention) भी प्रभावी हो गई है। यह कदम लगभग 75,000 भारतीय पेशेवरों के लिए वरदान साबित होगा, जो यूके में अस्थायी रूप से कार्य करते हैं। इसके तहत, उन्हें और उनके नियोक्ताओं को अब 5 वर्ष तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान में छूट मिलेगी, जिससे उनके सालाना लगभग 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत होगी।
सेवा क्षेत्र और प्रतिभा का सम्मान
समझौता आईटी, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और इंजीनियरिंग सहित 137 उप-क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, पेशेवरों की आवाजाही को सरल बनाया गया है। एक अनूठी पहल के तहत, अब हर साल 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीतकारों को यूके में अपने कौशल का प्रदर्शन करने के अवसर मिलेंगे।
एमएसएमई और संवेदनशीलता का ध्यान
समझौते में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे डेयरी, सेब, अनाज और खाद्य तेल—की सुरक्षा के लिए सख्त नियम सुनिश्चित किए हैं, ताकि घरेलू उत्पादकों के हितों से कोई समझौता न हो।
भविष्य की दिशा
यह समझौता केवल सामानों के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और सतत विकास जैसे आधुनिक आयामों को भी कवर करता है। सरकार का मानना है कि यह साझेदारी ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को गति देने में अहम भूमिका निभाएगी।


