रायपुर

छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी नई पहचान: मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए की निधि प्रस्तावित

रायपुर |

​छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक आस्था के केंद्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ की विस्तृत कार्ययोजना को हरी झंडी दे दी गई।

​मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि पर्यटन का विकास केवल सौंदर्यीकरण या अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को मजबूत आधार देना है।

​500 करोड़ रुपए की मिशन निधि: छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा तैयार इस मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए की मूल निधि प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा पीपीपी (PPP), सीएसआर (CSR) और केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाने का लक्ष्य है।

​रोजगार और स्वरोजगार के अवसर: प्रदेश में 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार किए जाएंगे और 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। साथ ही 600 आतिथ्य कर्मियों और 500 टूर गाइडों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

​आवास क्षमता में विस्तार: पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने और उनके औसत प्रवास की अवधि को दो दिन करने के लिए 12,000 अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए निजी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है।

​डिजिटल तकनीक का उपयोग: पर्यटकों की सुगमता के लिए बहुभाषी पर्यटन वेबसाइट, मोबाइल ऐप, एआई (AI) आधारित सूचना प्रणाली, डिजिटल बुकिंग और रियल-टाइम नेविगेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू की जाएंगी।

​ प्रथम चरण में इन प्रमुख स्थलों का होगा कायाकल्प

​मिशन के प्रथम चरण के तहत उच्च प्रभाव वाले प्रमुख पर्यटन गंतव्यों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा:

​प्रमुख गंतव्य: चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम।

​अन्य विकसित होने वाले क्षेत्र: मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी।

​इन सभी स्थानों पर बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र और प्राथमिक चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्राथमिकता से विकास किया जाएगा।

​चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट का विकास

​पर्यटकों को विविधतापूर्ण अनुभव देने के लिए राज्यभर में 4 प्रमुख पर्यटन सर्किट और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर 15 से 20 वे-साइड सुविधाएं और लगभग 500 पर्यटन संकेतक (साइनबोर्ड्स) स्थापित किए जाएंगे, जिससे पर्यटकों की यात्रा बेहद सुगम हो सकेगी।

​ ‘पर्यटन से समृद्धि’ है मूल मंत्र

​सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य ध्येय ‘पर्यटन से समृद्धि’ है। इसके तहत ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला और स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिकों और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।

​योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मार्गदर्शक समिति तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय संचालन समिति का गठन किया गया है। बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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