छत्तीसगढ़

बस्तर की नई पहचान पर्यटन से गढ़ने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

​– लेह-लद्दाख अध्ययन भ्रमण से लौटे पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात

​– छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने की जरूरत

​रायपुर (दीपक साहू )

छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और अद्भुत जैव विविधता से भरपूर बस्तर में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की पहचान उसकी वास्तविक खूबसूरती के अनुरूप नहीं बन पाई थी। अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं और बस्तर शांति, विश्वास, विकास और पर्यटन की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर की इस बदलती तस्वीर को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विचार मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में लेह-लद्दाख के अध्ययन एवं एक्सपोजर विजिट से लौटे पत्रकारों से सौजन्य मुलाकात के दौरान व्यक्त किए।

​प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम है बस्तर

​मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्रकारों के साथ आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि बस्तर प्रकृति की अनुपम देन है। यहां के घने वन, मनोरम जलप्रपात, नदियां, पहाड़ और गुफाएं जितनी आकर्षक हैं, उतनी ही विशिष्ट यहां की जनजातीय संस्कृति, परंपराएं, लोककला, हस्तशिल्प और जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि बस्तर की इन विशेषताओं को प्रभावी ढंग से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रस्तुत किया जाए।

​नक्सलवाद की छाया से निकलकर शांति की राह पर

​मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते चार दशकों में बस्तर का नाम राष्ट्रीय मीडिया में अधिकांशतः नक्सलवाद और हिंसा से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में सामने आता रहा है, जिससे इसकी वास्तविक पहचान पीछे छूट गई थी। अब नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता और क्षेत्र में स्थापित हो रहे शांति के वातावरण ने विकास के नए द्वार खोले हैं। सड़क, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ अब पर्यटन क्षेत्र में भी नई संभावनाएं आकार ले रही हैं।

​सकारात्मक कहानियों से बदलेगी बस्तर के प्रति धारणा

​पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी बस्तर की वास्तविक खूबसूरती और वहां हो रहे बदलावों से भली-भांति परिचित हैं। राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से जब बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति की सकारात्मक कहानियां देश के सामने आएंगी, तो लोगों की बस्तर के प्रति धारणा भी बदलेगी। उन्होंने कहा कि हमारा साझा प्रयास होना चाहिए कि बस्तर को अब नक्सलवाद से नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और विकास के लिए जाना जाए।

​स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर

​मुख्यमंत्री श्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यटन केवल पहचान का विस्तार नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा आधार है। बस्तर में पर्यटन बढ़ने से होटल, होम-स्टे, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और गाइड सेवा जैसे क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मिलेगा।

​लेह-लद्दाख का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भौगोलिक विशिष्टताओं वाले क्षेत्रों में सुव्यवस्थित पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। इस मुलाकात के दौरान पत्रकारों ने लेह-लद्दाख के पर्यटन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।

​इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित कई गणमान्य पत्रकारगण उपस्थित थे।

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