बिलासपुर, 1 जुलाई 2026 – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आज नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर जिला स्तरीय ‘शाला प्रवेशोत्सव’ का आयोजन सेजेस लाल बहादुर शास्त्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के देवकीनंदन दीक्षित सभागार में हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
बच्चों के साथ ‘न्योता भोज’ और सरस्वती साइकिल वितरण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अतिथियों द्वारा नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर और मुंह मीठा कराकर किया गया आत्मीय स्वागत रहा। केंद्रीय मंत्री और उप मुख्यमंत्री ने न्योता भोज में बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया, जिससे बच्चों का उत्साह दोगुना हो गया। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की सरस्वती साइकिल योजना के तहत पात्र छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं।
शिक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: केंद्रीय मंत्री
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव महज एक रस्म नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का उत्सव है। उन्होंने बच्चों को संस्कारवान बनने और मन लगाकर पढ़कर प्रदेश व देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी: उप मुख्यमंत्री
अध्यक्षता कर रहे उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि सरकार विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं—जैसे भवन, पेयजल, शौचालय और फर्नीचर—के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने छात्रों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी अपनी प्रतिभा से पूरे देश में राज्य का गौरव बढ़ाएंगे।
तीन महीने में जिले के हर स्कूल में होगी ‘स्मार्ट क्लास’
जिला कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिले में शिक्षा की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिले के 1800 से अधिक स्कूलों में लगभग 1 लाख 67 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने घोषणा की कि आगामी तीन माह के भीतर जिले के प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक ‘स्मार्ट क्लास’ स्थापित कर दी जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए शिक्षक सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बिल्हा शासकीय स्कूल के शिक्षक श्री कलेश्वर साहू को सम्मानित किया गया, जिन्होंने दो लाख ‘सीड बॉल’ (बीज के गोले) तैयार किए हैं। इसके अलावा, सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी उनके निःशुल्क शैक्षणिक सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में पालकों की उपस्थिति में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।


