अब घर बैठे बुक कर सकेंगे रेल पार्सल, लॉन्च होगा ‘रेल पार्सल ऐप
घर से पिकअप, ट्रेन से परिवहन और सीधे घर तक सुरक्षित डिलीवरी की मिलेगी सुविधाशुरुआती चरण में देश के 8 प्रमुख शहरों से होगी शुरुआत, डिजिटल ट्रैकिंग और ओटीपी आधारित होगी डिलीवरी

बिलासपुर
भारतीय रेल पार्सल सेवा को आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों, किसानों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए बेहद सरल, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल की जा रही है। इसके तहत “रेल पार्सल ऐप – घर से घर तक” विकसित किया जा रहा है, जो एंड्रॉइड, आईओएस और वेब प्लेटफॉर्म दोनों पर उपलब्ध होगा। इस अत्याधुनिक सेवा का उद्देश्य ग्राहकों को पार्सल बुकिंग के झंझटों और रेलवे स्टेशनों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना है।

कैसे काम करेगी ‘डोर-टू-डोर’ पार्सल सेवा?
अब ग्राहकों को अपना सामान लेकर खुद रेलवे पार्सल कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस सेवा को तीन चरणों में बांटा गया है:
- फर्स्ट माइल (First Mile): रेलवे से जुड़े लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता ग्राहक के घर या प्रतिष्ठान से पार्सल पिकअप करके स्टेशन तक पहुंचाएंगे।
- मिडिल माइल (Middle Mail): भारतीय रेल सुरक्षित रूप से ट्रेन के माध्यम से पार्सल को गंतव्य स्टेशन तक पहुंचाएगी।
- लास्ट माइल (Last Mile): गंतव्य स्टेशन से लॉजिस्टिक्स पार्टनर पार्सल को प्राप्तकर्ता के पते पर सुरक्षित पहुंचाएंगे।
प्रारंभिक चरण में यह अत्याधुनिक सुविधा देश के 08 प्रमुख शहरों – दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु एवं पुणे में लागू की जा रही है। इसके सफल संचालन के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में विस्तारित किया जाएगा।
‘रेल पार्सल ऐप’ की मुख्य विशेषताएं
आसान ऑनलाइन बुकिंग: ग्राहक अपने मोबाइल नंबर से ऐप पर रजिस्टर कर सकते हैं। इसके बाद पार्सल का विवरण, प्रस्थान एवं गंतव्य स्टेशन दर्ज कर बुकिंग की जा सकती है और अपनी पसंद का डिलीवरी पार्टनर भी खुद चुना जा सकेगा।
वैकल्पिक पिकअप व पैकेजिंग सेवाएं: घर से पिकअप और घर तक डिलीवरी की सेवाएं वैकल्पिक होंगी। ऐप पर समय-स्लॉट देखने की सुविधा मिलेगी। साथ ही, पैकिंग और भंडारण जैसी अतिरिक्त सेवाएं भी वैकल्पिक रूप से ली जा सकेंगी।
पूरी तरह कागज़ रहित प्रक्रिया: ऐप पर दर्ज विवरण ही डिजिटल फॉरवर्डिंग नोट माना जाएगा। रेल यात्रा के लिए भौतिक वे-बिल की जरूरत नहीं होगी; केवल डिजिटल रसीद और ओटीपी ही पर्याप्त होंगे।
सिंगल-क्लिक डिजिटल भुगतान: रेल भाड़ा, पिकअप-डिलीवरी शुल्क और अन्य सेवाओं का भुगतान एक ही बार में यूपीआई, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकेगा।
रियल-टाइम ट्रैकिंग: हर पार्सल को एक विशिष्ट 10-कों का ट्रैकिंग नंबर मिलेगा। पार्सल लोड होने, ट्रेन के पहुंचने और डिलीवरी के लिए तैयार होने की सूचना आटोमैटिक एसएमएस और ऐप नोटिफिकेशन के जरिए मिलती रहेगी।
ओटीपी आधारित सुरक्षित डिलीवरी: पार्सल की डिलीवरी केवल सुरक्षित ओटीपी सत्यापन के बाद ही की जाएगी।
बीमा का विकल्प: रेल परिवहन के दौरान नियमों के तहत पार्सल का मूल्य घोषित करने और बीमा कराने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
बुकिंग और रद्दीकरण से जुड़े जरूरी नियम
बुकिंग का समय: ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से अधिकतम 15 दिन पहले से लेकर न्यूनतम 01 दिन पहले तक (स्थान की उपलब्धता के अनुसार) बुकिंग की जा सकेगी।
रिफंड नीति: पिकअप से पहले बुकिंग रद्द करने पर नियमानुसार राशि रिफंड की जाएगी। पिकअप-डिलीवरी शुल्क की वापसी संबंधित लॉजिस्टिक्स पार्टनर की नीति के अधीन होगी।
स्टेशन से प्राप्ति: यदि ग्राहक ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ का विकल्प नहीं चुना है, तो उन्हें निर्धारित निःशुल्क अवधि के भीतर गंतव्य स्टेशन से पार्सल प्राप्त करना होगा।
छोटे व्यापारियों, किसानों और आम जनता को होंगे ये बड़े लाभ
समय और श्रम की बचत: लंबी कतारों में लगने और स्टेशन आने-जाने की झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।
व्यापार का विस्तार: किफायती रेल किराए और घर-से-घर तक की सुविधा मिलने से स्थानीय कारीगरों, किसानों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं के उत्पाद दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
पर्यावरण संरक्षण: सड़क मार्ग की तुलना में रेल परिवहन अधिक ऊर्जा-कुशल है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नए अवसर: वर्चुअल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म के जरिए स्थानीय डिलीवरी कंपनियां इस नेटवर्क से जुड़ सकेंगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रेलवे की ओर से ग्राहकों से अनुरोध किया गया है कि वे पार्सल को मजबूत बक्सों या बोरियों में सुरक्षित पैक करें और सामग्री का सही मूल्य घोषित करें। ज्वलनशील, विस्फोटक या प्रतिबंधित वस्तुओं की बुकिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
