बिलासपुर

​साहित्य, संगीत और पारंपरिक खीर का संगम: बिलासपुर में सफलतापर्वक संपन्न हुआ शरद उत्सव एवं कवि सम्मेलन

बिलासपुर

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार की शाम शहर के प्रमुख आकर्षण रिवर व्यू में ‘कविता चौपाटी से…’ के तत्वावधान में शरद उत्सव एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। साहित्यिक गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास से परिपूर्ण इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने कवियों और रचनाकारों ने अपनी कविताओं, गीतों और ओजस्वी काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

​अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति और कृतियों का अनावरण

​कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव अग्रवाल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में द्वारिका वैष्णव उपस्थित रहे। इस साहित्यिक संध्या का एक विशेष आकर्षण अवधेश अग्रवाल (भारत) की दो नवनिर्मित रचनाओं का आधिकारिक अनावरण रहा। शरद पूर्णिमा के चांद की खूबसूरती और सांस्कृतिक महत्व पर आधारित विशेष गीतों की प्रस्तुतियों ने इस शाम को और भी जीवंत बना दिया।

​प्रमुख कवियों की प्रस्तुतियां

  • ​डॉ. सुधाकर बिवे (भाटापारा)
  • ​राकेश अयोध्या (हिर्री माइंस)
  • ​किशोरी साहू (गोड़पारा)
  • ​रश्मी गुप्ता (आर.के. नगर)
  • ​अशरफी सोनी (सरकंडा)
  • ​शैलेन्द्र गुप्ता (नेहरू नगर)
  • ​शिशिर मौर्य (ढेका)

​कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज, प्रेम, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को खूबसूरती से उकेरा, जिस पर श्रोताओं ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।

​परंपरागत खीर वितरण के साथ समापन

​साहित्य और संगीत से सजी इस अनूठी संध्या का समापन शरद पूर्णिमा की पारंपरिक मिठास के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी श्रोताओं और अतिथियों को पारंपरिक खीर का प्रसाद वितरित किया गया।

​इस आयोजन में राजेन्द्र मौर्य, महेश श्रीवास, रामेश्वर गुप्ता, राधेश्याम सोनवानी, महेतरु मधुकर, दिलीप दिलफ़रोश, दीपक दुबे, पूर्णिमा तिवारी, पूजा मौर्य, गजानंद पात्रे ‘सत्यबोध’, एन.के. शुक्ला, राकेश खरे, राजेश सोनार, शत्रुघ्न पात्रे, अमृतलाल पाठक, रश्मी अग्रवाल एवं राजेश मानस सहित बड़ी संख्या में शहर के साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

​कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने इस आयोजन की सफलता के लिए सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य कविता और साहित्य के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव एवं मानवीय संवेदनाओं को प्रोत्साहित करना था, जो पूरी तरह सफल रहा।

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