रायपुर: छत्तीसगढ़ में गौ संरक्षण और संवर्धन को अब एक जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की रीढ़ हैं। इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण और लोक-कल्याणकारी पहल की शुरुआत की है, जिससे ग्रामीण अंचलों में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुल रहे हैं।
शासन की प्रमुख और प्रभावी पहल:
- ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान: समाज के हर वर्ग को गौसेवा से जोड़ने के लिए इस नए प्रदेशव्यापी अभियान का आगाज किया गया है, ताकि घर-घर में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े।
- चारे के अनुदान में भारी बढ़ोतरी: पंजीकृत गौशालाओं में अब प्रति गाय चारे की सहायता राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है, जिससे गौवंश के भरण-पोषण और देखभाल में और अधिक सुधार होगा।
- ‘सुरभि गौधाम योजना’: आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘सुरभि गौधाम’ का निर्माण किया जा रहा है, जहां पशु चिकित्सकों और चरवाहों की उपलब्धता के साथ गौवंश के लिए सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
- बस्तर में डेयरी विकास का नया अध्याय: बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास के नए दौर के बीच, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से देसी गाय उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई है। इस पहल से दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसका विस्तार अब अन्य पशुपालकों तक भी किया जा रहा है।
- गोबर और गोमूत्र आधारित आजीविका: गोबर से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्माण और प्रशिक्षण से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।
नई पीढ़ी में संस्कारों का संचार:
राज्य में आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा में इस बार 1.64 लाख से अधिक विद्यार्थियों की रिकॉर्ड सहभागिता देखने को मिली। यह इस बात का प्रमाण है कि आज की युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति गहराई से जागरूक हो रही है। इस परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को आकर्षक पुरस्कारों से सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया है।


